नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के छोटे भाई व जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री मुस्तफा कमाल का निधन
अविनाश
- 14 Jul 2026, 09:11 PM
- Updated: 09:11 PM
श्रीनगर, 14 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के छोटे भाई और नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के वरिष्ठ नेता मुस्तफा कमाल का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। पार्टी के एक नेता ने यह जानकारी दी।
पार्टी नेता ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के मौजूदा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के चाचा और पूर्व मंत्री कमाल का यहां एक निजी अस्पताल में मंगलवार शाम करीब पांच बजे 83 साल की उम्र में निधन हो गया।
फारूक अब्दुल्ला के छोटे भाई कमाल ने विवाह नहीं किया था। वह नेकां के अतिरिक्त महासचिव थे।
उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''मेरे पिता के छोटे भाई डॉ. मुस्तफा कमाल का आज शाम श्रीनगर के पारस अस्पताल में निधन हो गया। चाचा मुस्तफा कुछ महीनों से बीमार थे, लेकिन चार दिन पहले उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी।''
उमर अब्दुल्ला ने लिखा, ''उन्होंने मुश्किल हालात का बहादुरी से सामाना किया। उनका इलाज करने वाले चिकित्सक और अन्य कर्मी बहुत अच्छे थे, लेकिन अल्लाह ने उन्हें अपनी आखिरी यात्रा के लिए बुला लिया। अल्लाह चाचा मुस्तफा को जन्नत नसीब करें।''
राजनीति में आने से पहले कमाल ने चिकित्सा के क्षेत्र में अपना करियर बनाया और 1962 में राजस्थान के जयपुर स्थित सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी।
उनके विधायी करियर की शुरुआत 1983 में जम्मू-कश्मीर विधान परिषद के लिए निर्वाचित होने के साथ हुई। वह 1987 तक तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल के उच्च सदन के सदस्य रहे।
कमाल बाद में बारामूला जिले के गुलमर्ग विधानसभा सीट से विधायक रहे।
इस दौरान, कमाल ने कई राज्य सरकारों में अहम मंत्री पद संभाले। उन्होंने 1983, 1987 और 1996 में बनी सरकारों में मंत्री के तौर पर काम किया।
जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा सहित कई नेताओं ने कमाल के निधन पर शोक व्यक्त किया।
सिन्हा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर जारी पोस्ट में कहा, ''वरिष्ठ नेता डॉ. मुस्तफा कमाल के निधन की खबर से मुझे गहरा दुख हुआ है। मैं उनके परिवार, शुभचिंतकों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। ओम शांति!''
नेशनल कांफ्रेंस ने एक बयान में कहा, ''जम्मू-कश्मीर के लोगों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता, सिद्धांतों पर आधारित नेतृत्व और अडिग समर्पण की वजह से उन्हें राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में बहुत सम्मान मिला। उनका निधन न केवल नेशनल कांफ्रेंस परिवार के लिए, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए भी एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। लोग हमेशा उनके योगदान को कृतज्ञता और सम्मान के साथ याद रखेंगे।''
डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद और अपनी पार्टी के प्रमुख अल्ताफ बुखारी ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश
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