गुरुग्राम में रियल एस्टेट 'धोखाधड़ी' : कात्याल से जुड़ा धनशोधन मामला दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित
वैभव
- 14 Jul 2026, 10:14 PM
- Updated: 10:14 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने गुरुग्राम में घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़े उस धन शोधन मामले को मंगलवार को दिल्ली की विशेष पीएमएलए अदालत में स्थानांतरित कर दिया, जिसमें रियल एस्टेट कारोबारी अमित कात्याल आरोपी हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कात्याल की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया, जिसमें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामले को दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया था।
पीठ ने कहा, "हम हरियाणा के गुरुग्राम में विशेष पीएमएलए न्यायाधीश के समक्ष लंबित धन शोधन मामले की कार्यवाही दिल्ली स्थित साकेत न्यायालय परिसर में विशेष पीएमएलए न्यायाधीश के पास स्थानांतरित करने का निर्देश देते हैं। दिल्ली की अदालत में अभियोजन पक्ष की कार्यवाही उसी चरण से आगे बढ़ेगी, जिसमें वह वर्तमान में गुरुग्राम की अदालत में लंबित है।"
न्यायालय ने कहा, "मौजूदा मामले में पीएमएलए की धारा-4 के तहत अपराध का एक हिस्सा दिल्ली में अपराध से अर्जित राशि को छिपाए जाने के रूप में हुआ था। ऐसे में दिल्ली और गुरुग्राम, दोनों की पीएमएलए अदालतों के पास इस मामले की सुनवाई करने का अधिकार है।"
पीठ ने कहा, "अभियोजन की शिकायत में लगाए गए निर्विवाद आरोप स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी की गई और अपराध से हासिल राशि गुरुग्राम में अर्जित की गई, जहां संबंधित परियोजना मौजूद है। गुरुग्राम में जमीन का एक बड़ा हिस्सा, जो अपराध से हुई कमाई का हिस्सा है, उसे भी कुर्क किया गया है। ऐसे में गुरुग्राम में पीएमएलए के तहत अभियोजन शुरू किए जाने को गलत नहीं ठहराया जा सकता।"
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुग्राम में घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में कात्याल को पिछले साल 19 नवंबर को गिरफ्तार किया था।
कात्याल को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद के परिवार का करीबी माना जाता है। उन्हें रेलवे में कथित 'जमीन के बदले नौकरी' घोटाले से जुड़े धन शोधन के एक अलग मामले के सिलसिले में 2023 में भी गिरफ्तार किया गया था।
इस मामले में लालू, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और परिवार के अन्य सदस्य भी आरोपी हैं।
हालांकि, कात्याल को बाद में जमानत मिल गई।
घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी का मामला गुरुग्राम के सेक्टर-70 में 14 एकड़ जमीन में बने 'क्रिश फ्लोरेंस एस्टेट' में फ्लैट का कब्जा न दिए जाने के आरोपों से जुड़ा हुआ है। इस परियोजना का निर्माण कात्याल की कंपनी 'एंजिल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड' कर रही थी।
ईडी के मुताबिक, कात्याल ने "धोखाधड़ी" के जरिये दूसरे डेवलपर से लाइसेंस हासिल किया और हरियाणा में नगर एवं ग्राम नियोजन निदेशालय (डीटीसीपी) से लाइसेंस मिलने से बहुत पहले ही संभावित खरीदारों से पैसे इकट्ठा करना शुरू कर दिया, जिससे 300 करोड़ रुपये की "आपराधिक आय" अर्जित हुई।
एजेंसी ने अपनी जांच में पाया कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए निर्मित एक परियोजना में कात्याल ने तीसरे पक्षों के नाम पर कई "फर्जी" बुकिंग की और संबंधित राशि का "इस्तेमाल" दूसरे कामों में किया, जिसकी वजह से परियोजना अटक गई।
ईडी ने कात्याल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने दिवाला कार्यवाही के दौरान 130 करोड़ रुपये की कीमत वाली दो एकड़ लाइसेंस-प्राप्त जमीन का एक हिस्सा कम कीमत पर तीसरे पक्ष को सौंप दिया। एजेंसी ने इसे दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत कानूनी प्रक्रिया का साफ तौर पर उल्लंघन बताया है।
ईडी का आरोप है कि सरकारी बैंक से लिए गए बड़े कर्ज को भी धोखाधड़ी वाले लेन-देन के जरिये "दूसरे कामों में लगा दिया गया" और बैंक को लगभग 80 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
भाषा पारुल वैभव
वैभव
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