आपसी मतभेदों को भूलकर भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर लड़ें विपक्षी दल: माकपा
अविनाश
- 14 Jul 2026, 10:16 PM
- Updated: 10:16 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मंगलवार को 'इंडिया' गठबंधन के घटक दलों के बीच अधिक एकजुटता की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि विपक्षी दलों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ व्यापक राजनीतिक लड़ाई को प्राथमिकता देनी चाहिए।
पार्टी ने नीट-यूजी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों के आंदोलन के प्रति अपना समर्थन भी दोहराया।
माकपा की केंद्रीय समिति ने जंतर-मंतर पर पिछले 17 दिनों से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य पर भी चिंता व्यक्त की। पार्टी ने कहा कि उसके सांसद भी इस प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं।
केंद्रीय समिति की बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में माकपा महासचिव एम.ए. बेबी ने कहा कि भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और प्रगतिशील दलों को विपक्षी एकता मजबूत करनी होगी।
उन्होंने कहा, ''हम सभी देख रहे हैं कि भाजपा देश के विभिन्न हिस्सों में अपना प्रभाव बढ़ा रही है। भाजपा के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और प्रगतिशील राजनीतिक दलों को एकजुट होने की जरूरत है।''
बेबी ने विपक्षी दलों के बीच ''एक समान दृष्टिकोण'' के अभाव पर अफसोस जताते हुए कहा कि कुछ दल आपसी मतभेदों को अधिक महत्व दे रहे हैं। उन्होंने कहा, ''माकपा का स्पष्ट मत है कि विपक्षी दलों के बीच चाहे जितने भी मतभेद हों, उन्हें भाजपा और उसके सहयोगियों के खिलाफ संघर्ष को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।''
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी एकता कायम करना आसान नहीं है।
बेबी का कहना था, ''इस राह में अनेक बाधाएं और कठिनाइयां हैं। विपक्ष के प्रत्येक राजनीतिक दल को इस मुद्दे पर जिम्मेदार और संवेदनशील होना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य से विभिन्न राजनीतिक दल इस कार्य को अपेक्षित राजनीतिक और वैचारिक महत्व नहीं दे रहे हैं।''
यह पूछे जाने पर कि क्या माकपा राहुल गांधी को 'इंडिया' गठबंधन के नेता के रूप में स्वीकार करेगी, बेबी ने कहा कि गठबंधन में ऐसा कोई पद ही नहीं है।
उन्होंने कहा, '''इंडिया' गठबंधन में किसी नेता का चुनाव नहीं हुआ है। राहुल गांधी गठबंधन के सबसे बड़े दल के नेता हैं और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। एक समय मल्लिकार्जुन खरगे को गठबंधन का अध्यक्ष चुना गया था। सहयोग और विपक्षी एकता के लिए सभी विपक्षी दलों के नेतृत्व में राजनीतिक परिपक्वता होनी चाहिए। लेकिन कुछ नेताओं और कुछ दलों के मामले में इस परिपक्वता का अभाव दिखाई देता है।''
भाषा हक अविनाश
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