दिल्ली सरकार ने समयबद्ध सेवा को कानूनी अधिकार बनाने संबंधी विधेयक को मंजूरी दी
अविनाश
- 15 Jul 2026, 09:39 PM
- Updated: 09:39 PM
नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) दिल्ली सरकार ने नागरिकों को सरकारी सेवाएं तय समय में मुहैया कराने को कानूनी अधिकार बनाने संबंधी विधेयक को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने बुधवार को यह जानकारी दी।
सीएमओ के मुताबिक, यह फैसला मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि इस सुधार का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को नागरिकों तक पहुंचाने में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता को सुनिश्चित करना है।
सीएमओ ने बताया कि मंत्रिमंडल ने दिल्ली के नागरिकों का समयबद्ध व सुगम सेवा प्रदाय का अधिकार विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है।
इसने कहा कि यह विधेयक 2011 के कानून की जगह लेगा और नागरिकों पर केंद्रित शासन के लिए आधुनिक, तकनीक-आधारित कानूनी ढांचा तैयार करेगा।
सीएमओ के मुताबिक, इस कदम से दिल्ली के हर नागरिक को कानूनी अधिकार के तौर पर तय समय-सीमा में सेवाएं मिलेंगी। यह सेवा पूरी तरह से डिजिटल रूप में दी जाएंगी और व्यवस्था में देरी होने पर मामले स्वत: उच्चतर स्तर पर स्थानांतरित हो जाएंगे।
बयान में कहा गया है कि नए कानून में नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए स्वतंत्र दिल्ली सेवा अधिकार आयोग का गठन किया जाएगा। जवाबदेही तय करने के लिए जुर्माना और पारदर्शी, तकनीक आधारित व नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था इसमें शामिल होंगी।
इसमें कहा गया है कि बिना उचित कारण के सेवा प्रदान करने में देरी होने पर संबंधित अधिकारी पर प्रति दिन 250 रुपये का दंड लगाया जा सकेगा और दंड की अधिकतम सीमा 5,000 रुपये होगी। हालांकि अधिकारी पर दंड लगाने से पहले उसे अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया जाएगा, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित हो।
वर्तमान में लगभग 560 सरकारी सेवाएं समयबद्ध वितरण तंत्र के अंतर्गत आती हैं। नयी फैक्टरी की मंजूरी, सीवेज कनेक्शन और फिल्मों की शूटिंग की 15 दिनों के भीतर अनुमति सहित 23 और सेवाओं को पिछले महीने इस प्रणाली के तहत लाया गया था।
गुप्ता ने कहा, "इस विधेयक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक नागरिक को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सरकारी सेवाएं प्राप्त हों। साथ ही, सरकारी विभागों और अधिकारियों को सेवा प्रदान करने में होने वाली देरी तथा लापरवाही के लिए अधिक जवाबदेह बनाया जाए।"
उन्होंने कहा कि यह कानून दिल्ली में प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा और नागरिकों को अधिक पारदर्शी, सरल, प्रभावी और तकनीक आधारित सेवाएं उपलब्ध कराने में मील का पत्थर बनेगा।
बयान में कहा गया है कि विधेयक के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को अधिसूचित सरकारी सेवाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार मिलेगा तथा सरकार समय-समय पर अधिसूचना जारी कर यह निर्धारित करेगी कि कौन-कौन सी सेवाएं इस कानून के दायरे में होंगी।
इसके मुताबिक, विधेयक में आवेदन से लेकर सेवा प्राप्त होने तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने का प्रावधान किया गया है। नागरिक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे, प्रत्येक आवेदन को विशिष्ट आवेदन संख्या मिलेगी और उसकी स्थिति की वास्तविक समय में ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी।
बयान में कहा गया है कि विधेयक में स्वतः अपील (ऑटोमैटिक एस्केलेशन) की व्यवस्था का प्रस्ताव है यानी यदि कोई नामित अधिकारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर सेवा उपलब्ध नहीं कराता है तो व्यक्ति को अलग से अपील दायर करने की आवश्यकता नहीं होगी।
इसमें कहा गया है, "मामला स्वतः नागरिक शिकायत निवारण प्राधिकारी के समक्ष अपील के रूप में पहुंच जाएगा। यदि निर्धारित अवधि में वहां भी निर्णय नहीं होता है तो मामला स्वतः दिल्ली सेवा का अधिकार आयोग के समक्ष पहुंच जाएगा। इससे पूरी व्यवस्था में स्वतः जवाबदेही सुनिश्चित होगी और नागरिकों को अनावश्यक प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।"
बयान के अनुसार, यह आयोग कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी, सरकारी कार्यालयों का निरीक्षण, लापरवाही करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करने के साथ ही आवश्यकतानुसार नयी सेवाओं को इस कानून के दायरे में लाने की अनुशंसा करेगा।
अधिकारियों ने बताया कि इस विधेयक को दिल्ली विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।
भाषा नो नोमान अविनाश
अविनाश
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