अमेरिका की नाकेबंदी के बाद ईरान ने पश्चिम एशिया से ऊर्जा निर्यात रोकने की धमकी दी
मनीषा
- 15 Jul 2026, 02:52 PM
- Updated: 02:52 PM
दुबई, 15 जुलाई (एपी) अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का प्रयास कर रहे पोतों पर ईरान के हमलों के बाद ईरानी बंदरगाहों पर बुधवार तड़के फिर से नाकेबंदी कर दी।
इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वाले देशों पर फिर से हमले किए। इससे युद्ध समाप्त करने के लिए हुआ अंतरिम समझौता और कमजोर पड़ गया है।
अमेरिका और ईरान दोनों उस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे युद्ध से पहले दुनिया में होने वाले कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का पांचवां हिस्सा गुजरता था। इन हालिया हमलों के कारण क्षेत्र के पूर्ण युद्ध की चपेट में आने का खतरा फिर से बढ़ गया है।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार रातभर हुए हमलों में 260 से अधिक लोग घायल हुए। इससे संकेत मिलता है कि बमबारी तेज हो गई है।
ईरान सरकार की प्रवक्ता फातिमा मोहाजेरानी ने अधिक जानकारी दिए बिना कहा कि ''हाल के दिनों'' में 30 से अधिक लोग मारे गए हैं।
अमेरिका ने पहली बार अप्रैल के मध्य में नाकेबंदी लागू की थी और जून के मध्य में इसे हटा लिया था। नाकेबंदी हटाने से एक दिन पहले एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय किया गया था लेकिन जलडमरूमध्य को लेकर हमले तेज होने के कारण यह बातचीत रुक गई है।
नाकेबंदी के जवाब में ईरान के अर्द्धसैनिक बल 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' ने पश्चिम एशिया से होने वाला समूचा ऊर्जा निर्यात रोकने की बुधवार को धमकी दी।
उसने कहा, ''क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात या तो सभी के लिए होगा या किसी के लिए नहीं।''
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को नाकेबंदी फिर से लागू करने की घोषणा करते समय कहा था कि वह जलडमरूमध्य से गुजरने वाले पोतों पर 20 प्रतिशत शुल्क भी लगाएंगे, लेकिन नाकेबंदी फिर शुरू किए जाने से कुछ घंटे पहले उन्होंने फारस की खाड़ी के सहयोगी देशों के अनुरोध का हवाला देते हुए शुल्क वसूलने की योजना छोड़ दी।
'यूएस सेंट्रल कमान' ने बुधवार को कहा कि नाकेबंदी फिर लागू करते हुए अमेरिका ने ईरान पर सात घंटे तक हमले किए और इस दौरान उसके कई स्थलों को निशाना बनाया गया।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन करमानपुर ने बुधवार को 260 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी दी, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि इन हमलों में कितने लोग मारे गए।
करमानपुर द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुई हिंसा के अन्य दौर की तुलना में इन हमलों में कहीं अधिक लोग घायल हुए हैं।
अधिकारियों ने तत्काल इसका कोई कारण नहीं बताया। हालांकि, स्थानीय स्तर पर आई शुरुआती खबरों से संकेत मिला कि ओमान की खाड़ी के तट पर स्थित ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिस्तान एवं बलूचिस्तान प्रांत में बड़ा हमला हुआ।
बहरीन और कुवैत में बुधवार तड़के मिसाइल हमलों की चेतावनी जारी की गई। दोनों देशों को ईरान के हमलों का सामना करना पड़ा। इस तरह के हमले लगभग रोज हो रहे हैं जिससे युद्धविराम पर और दबाव बढ़ गया है।
जॉर्डन ने कहा कि उसने ईरान की ओर से दागी गई तीन मिसाइलों को मार गिराया। ईरान ने इन तीनों देशों पर हमले की जिम्मेदारी ली है।
'यूएस सेंट्रल कमान' के प्रमुख नौसेना एडमिरल ब्रैड कूपर ने एक बयान में कहा कि ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों की ओर कई मिसाइल और ड्रोन दागे।
कूपर ने कहा, ''अमेरिकी बल ईरान को अकारण की गई उसकी उस आक्रामक कार्रवाई के लिए जवाबदेह ठहरा रहे हैं, जिससे निर्दोष लोगों का जीवन लगातार खतरे में पड़ रहा है।''
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। इसके बाद ईरान ने पोतों पर हमले करके और उन्हें धमकियां देकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया था। इससे तेल, उर्वरक और अन्य वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि हुई।
ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजर रहे उन पोतों पर हाल में हमले किए, जो ओमान के निकट अमेरिकी सेना की निगरानी वाले और तेहरान के नियंत्रण से बाहर के समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे। इन हमलों के बाद हिंसा का नया दौर शुरू हुआ।
अमेरिका ने बल प्रयोग करके जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की धमकी दी है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए कहीं अधिक बड़ा नौसैनिक बेड़ा और संभवतः दसियों हजार जमीनी सैनिकों की जरूरत होगी।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने उनके देश को निशाना बनाकर जारी अमेरिकी हमलों की आलोचना की।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'इरना' के अनुसार, इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र प्रमुख को लिखे पत्र में कहा, ''अमेरिका हमलावर है, पीड़ित नहीं।''
इस बीच, ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि खाड़ी क्षेत्र के ''राजाओं और अमीरों'' ने उन्हें फोन किया था। उन्होंने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले पोतों से शुल्क वसूलने के बजाय एक अन्य व्यवस्था का सुझाव दिया।
ट्रंप ने मंगलवार को 'ओवल ऑफिस' (राष्ट्रपति का कार्यालय) में संवाददाताओं से कहा, ''उन्होंने कहा कि हम इसे दूसरे तरीके से करना चाहेंगे। हम अमेरिका में अरबों-अरब डॉलर का निवेश करना चाहेंगे।''
ट्रंप ने कहा कि उन्हें पोतों से शुल्क वसूलने के बजाय यह व्यवस्था अधिक पसंद है, ''क्योंकि मेरा मानना है कि किसी को भी जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।''
ट्रंप ने मंगलवार रात 'फॉक्स न्यूज चैनल' से कहा था कि अगले दो दिन में ईरान पर और अमेरिकी हमले किए जाएंगे। ट्रंप ने चेतावनी दी, ''बेहतर होगा कि आप समझौता कर लें, अन्यथा आपके पास कुछ भी नहीं बचेगा।''
'यूएस सेंट्रल कमान' ने कहा कि उसने मंगलवार को ईरान के कई क्षेत्रों में हमले किए। ईरान ने इन हमलों की पुष्टि की।
'इरना' ने बताया कि अमेरिका द्वारा अपने हमले समाप्त करने की घोषणा किए जाने के कुछ घंटे बाद फारस की खाड़ी के तट पर स्थित ईरानी शहर बुशहर में कम से कम चार स्थानों पर हमले हुए।
ईरान के सरकारी मीडिया ने मंगलवार रात दक्षिण-पश्चिमी शहर अहवाज और दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में भी विस्फोट होने की सूचना दी।
इन हमलों से फिर यह आशंका पैदा हुई कि खाड़ी के अरब देश सार्वजनिक रूप से कुछ कहे बिना ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं।
कुवैत ने अलग से कहा कि मंगलवार को ईरान के एक हमले में उसकी नौसेना के चार सदस्य घायल हो गए और एक इमारत में आग लग गई।
एपी सिम्मी मनीषा
मनीषा
1507 1452 दुबई