ममता ने भाजपा पर तृणमूल के विरोध मार्च में बाधा डालने का आरोप लगाया
अविनाश
- 08 Jul 2026, 08:26 PM
- Updated: 08:26 PM
कोलकाता, आठ जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने बारुईपुर में 11 वर्षीय लड़की से दुष्कर्म और हत्या के विरोध में बुधवार को उनकी पार्टी के प्रदर्शन मार्च को बाधित करने का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आरोप लगाया।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि रैली की इजाजत देने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को लागू करने के बजाय पुलिस ने भाजपा की एक ''शाखा'' के तौर पर काम किया।
दक्षिण कोलकाता के हाजरा क्रॉसिंग पर प्रदर्शन मार्च के समापन के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थकों ने रैली को बार-बार बाधित किया और मार्ग में कई स्थानों पर महिला कार्यकर्ताओं सहित पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की। उन्होंने दावा किया कि अदालत के निर्देशों के बावजूद पुलिस कार्यक्रम का शांतिपूर्ण आयोजन सुनिश्चित करने में विफल रही।
उन्होंने कहा, ''उच्च न्यायालय ने हमारी रैली को अनुमति दी थी, लेकिन भाजपा के गुंडों ने इसे रोक दिया। रैली की अनुमति के अदालत के आदेश को पुलिस कैसे नजरअंदाज कर सकती है? भाजपा के गुंडों ने हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं को पीटा। क्या यही लोकतंत्र है?''
कलकत्ता उच्च न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद तृणमूल कांग्रेस की छात्र और युवा इकाइयों द्वारा आयोजित रैली बालीगंज फाड़ी से शुरू हुई और दक्षिण कोलकाता के कुछ हिस्सों से गुजरते हुए हाजरा क्रॉसिंग पर समाप्त हुई।
रैली के दौरान भाजपा और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ताओं ने ''चोर'' के नारे लगाए, हाजरा रोड पर कथित तौर पर मानव अवरोधक बनकर जुलूस को रोकने का प्रयास किया और मार्ग में कई स्थानों पर प्रदर्शन किया।
प्रशासन पर अपना हमला तेज करते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय के आदेश को लागू करने के बजाय पुलिस ने सुबह से ही उनके आवास की निगरानी शुरू कर दी थी और वहां आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी।
बनर्जी ने आरोप लगाया, ''मुझे इस तरह पुलिस निगरानी में रखा गया, जैसे मैं नजरबंद हूं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय वे इस बात पर नजर रख रहे हैं कि मेरे घर कौन आ रहा है।''
बनर्जी ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय ने मार्च के दौरान हैंड माइक के इस्तेमाल की अनुमति दी थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें जब्त कर लिया, जबकि भाजपा समर्थकों को डीजे बजाने, मंच लगाने और मार्ग में अवरोध पैदा करने की अनुमति दी गई।
उन्होंने कहा, ''अदालत की अनुमति के बावजूद हमारे हैंड माइक जब्त कर लिए गए, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं को उपद्रव करने दिया गया। महिलाओं, बुजुर्गों और युवा कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया। मैं खुद तब बाहर आई जब मुझे पता चला कि हमारी आईटी सेल अध्यक्ष को घेरकर उन पर हमला किया गया है। मैंने लोगों को खून से लथपथ देखा।''
यह आरोप लगाते हुए कि पुलिस अब निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रही है, बनर्जी ने कहा कि ''थाना स्तर से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक, सभी भाजपा पदाधिकारियों की तरह काम कर रहे हैं।''
उन्होंने आरोप लगाया, ''पुलिस आम लोगों को सुरक्षा नहीं दे पा रही है और उसका इस्तेमाल हमारे कार्यक्रम को विफल करने के लिए किया जा रहा है।''
तृणमूल प्रमुख बनर्जी ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश को लागू करने में कथित विफलता अदालत की अवमानना के बराबर है। उन्होंने घोषणा की कि उनकी पार्टी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी।
उन्होंने कहा, ''हमने उच्च न्यायालय के निर्देशों का सम्मान किया और रैली आयोजित करने से पहले अनुमति ली। यदि पुलिस खुद अदालत के आदेश का उल्लंघन करती है तो कानून के शासन पर गंभीर सवाल उठते हैं। हम अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध करेंगे।''
भाजपा पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया, ''अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में लूट करने वाले लोग भगवान राम के नाम पर यहां अशांति फैला रहे हैं।''
किसी का नाम लिए बिना उन्होंने केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर डरा धमकाकर लोकतांत्रिक प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, ''कोई भी सरकार लोगों की आवाज को दबा नहीं सकती और न ही डर तथा उत्पीड़न के जरिए उनके लोकतांत्रिक अधिकार छीन सकती है। यह सरकार पुलिस के समर्थन से असामाजिक तत्वों पर निर्भर है।''
बनर्जी ने दावा किया कि पिछले दो महीनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में दुष्कर्म, अत्याचार और हत्या की कई घटनाएं हुई हैं। उन्होंने अधिकारियों से ''शांति बहाल करने, कानून के शासन को कायम रखने और शांतिप्रिय नागरिकों की सुरक्षा'' का आग्रह किया।
उन्होंने सरकार पर जनकल्याण की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत अंडे बंद कर दिया गया है, जबकि राज्य के संसाधनों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।
बनर्जी के आरोपों पर भाजपा की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
बारुईपुर में चार जुलाई को लापता हुई लड़की का शव अगले दिन सूरज्यापुर हाट इलाके में एक तालाब से बरामद किया गया था।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि नाबालिग के साथ दुष्कर्म और हत्या करने के बाद शव को बोरे में डालकर फेंक दिया गया।
पुलिस के अनुसार, बारुईपुर नाबालिग दुष्कर्म-हत्या मामले के मुख्य आरोपियों में से एक प्रभास मंडल की बुधवार तड़के कथित मुठभेड़ में मौत हो गई।
एक अन्य फरार आरोपी कबीर मुल्ला को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे इस दुष्कर्म-हत्या मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या चार हो गई।
भाषा अमित अविनाश
अविनाश
0807 2026 कोलकाता