बुनियादी ढांचा कर्ज को प्राथमिक क्षेत्र ऋण में शामिल करने की जरूरत: एसबीआई अर्थशास्त्री
अजय
- 07 Jul 2026, 09:52 PM
- Updated: 09:52 PM
मुंबई, सात जुलाई (भाषा) भारतीय स्टेट बैंक के अर्थशास्त्रियों ने मंगलवार को प्राथमिक क्षेत्र ऋण दिशानिर्देश की समीक्षा किये जाने की वकालत की। उन्होंने बुनियादी ढांचा क्षेत्र को दिये जाने वाले कर्ज को इस श्रेणी में शामिल करने का सुझाव भी दिया है।
अर्थशास्त्रियों ने एक रिपोर्ट बताया कि वित्त वर्ष 2017-18 में प्राथमिक क्षेत्र ऋण (पीएसएल) प्रमाणपत्र कारोबार 1.8 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 12.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी खरीद या ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष में जमा पैसे को छोड़कर, कोई भी बैंक 40 प्रतिशत प्राथमिक क्षेत्र ऋण प्रमाणपत्र (पीएसएलसी) लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रहा है।
इसके अलावा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष (आरआईडीएफ) के लागत-लाभ विश्लेषण से पता चलता है कि बैंक आरआईडीएफ में निवेश करने के बजाय पीएसएलसी खरीदना अधिक फायदेमंद समझते हैं।
अर्थशास्त्रियों ने कहा, ''प्रधानमंत्री के 2047 के दृष्टिकोण को हासिल करने के लिए हमें बुनियादी ढांचे में भारी निवेश की जरूरत है। एक मजबूत बॉन्ड बाजार न होने की वजह से इसके लिए दीर्घकालिक संसाधन सीमित हैं।''
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि सभी बुनियादी ढांचा कर्ज को प्राथमिक क्षेत्र का दर्जा दिया जाए या पीएसएल लक्ष्य पूरा करने के लिए समायोजित शुद्ध बैंक ऋण की गणना से उन्हें छूट दी जाए।
इसमें आवास, शिक्षा ऋण और नवीकरणीय ऊर्जा समेत कई अन्य क्षेत्रों में भी बदलाव का सुझाव दिया गया।
रिपोट में कहा गया है कि आवास ऋण के मामले में भविष्य में औसत कर्ज राशि बढ़ने वाली है। इसलिए, आवास क्षेत्र के लिए कर्ज की सीमा महानगरों में एक करोड़ रुपये और अन्य केंद्रों के लिए 75 लाख रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया।
शिक्षा ऋण के लिए, पीएसएल वर्गीकरण के तहत कर्ज की सीमा को दोगुना करके 50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया गया है क्योंकि शिक्षा की लागत बढ़ रही है।
इसमें नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना के लिए पीएसएल के तहत आने वाले कर्ज की सीमा को मौजूदा 35 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये से अधिक करने का भी सुझाव दिया गया। साथ ही, छतों पर लगने वाले सौर संयंत्र के लिए व्यक्तिगत सीमा को मौजूदा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये करने का सुझाव दिया गया है।
भाषा रमण अजय
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