केरल: जाम लगाने के मामले में माकपा नेता को कार्यवाही समाप्त होने तक अदालत कक्ष में रहने की सजा
नरेश
- 07 Jul 2026, 12:39 PM
- Updated: 12:39 PM
तिरुवनंतपुरम, सात जुलाई (भाषा) तिरुवनंतपुरम में पिछले साल एक विरोध मार्च के दौरान यातायात जाम करने के मामले में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता पी पी चितरंजन को मजिस्ट्रेट द्वारा अदालत की कार्यवाही समाप्त होने तक कक्ष में ही रहने की सजा सुनाई गई।
चितरंजन के अलावा, केंद्रीय कर्मचारी संघ (सीटू) नेताओं पी एम वाहिदा और एन एल रामचंद्रन को भी तिरुवनंतपुरम की न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) तानिया मरियम जोस ने अदालत की कार्यवाही समाप्त होने तक खड़े रहने की सजा और प्रत्येक को 1,600 रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया।
यह मामला सहकारी अस्पतालों के कर्मचारियों के लिए नौकरी की सुरक्षा की मांग को लेकर सीटू से संबद्ध केरल सहकारी कर्मचारी संघ द्वारा 17 जनवरी 2025 को पलायम से सरकारी सचिवालय तक आयोजित एक विरोध मार्च से संबंधित है।
उस समय अलाप्पुझा से विधायक रहे चितरंजन ने इस मार्च का नेतृत्व किया था जिसमें लगभग 300 लोगों ने भाग लिया था। इस वजह से यातायात बुरी तरह जाम जाम हो गया जिसके बाद छावनी पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
पुलिस द्वारा अंतिम रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद यह मामला तीन जुलाई को अदालत के समक्ष आया था।
चितरंजन, वाहिदा और रामचंद्रन के वकील ने सोमवार को जल्द सुनवाई की मांग करते हुए एक याचिका दायर की और तीनों आरोपियों ने अभियोग स्वीकार कर लिये।
इसके बाद मजिस्ट्रेट ने उन्हें अदालत की कार्यवाही समाप्त होने तक खड़े रहने का आदेश दिया और प्रत्येक पर 1,600 रुपये का जुर्माना लगाया।
चितरंजन ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि वह दोपहर करीब 12 बजे से शाम साढ़े चार बजे तक अदालत कक्ष के अंदर रहे।
उन्होंने कहा, ''मैंने पहले भी ऐसे ही मामलों का सामना किया है जहां केवल जुर्माना लगाया गया था। यह पहली बार है जब मुझे अदालत की कार्यवाही समाप्त होने तक अदालत में रहने के लिए कहा गया है।''
चितरंजन ने कहा कि वह अदालत का सम्मान करते हैं और उन्होंने इस आदेश को स्वीकार किया।
उन्होंने कहा, ''यह विरोध प्रदर्शन श्रमिकों के लिए था। हालांकि, हम अदालत के फैसले को स्वीकार करते हैं।''
चितरंजन ने 2021 से 2026 तक अलाप्पुझा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था लेकिन हालिया चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
भाषा खारी नरेश
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