अनुच्छेद 370 को हटाने से श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा हुआ : प्रधानमंत्री मोदी
अविनाश
- 06 Jul 2026, 10:37 PM
- Updated: 10:37 PM
कोलकाता, छह जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाने से भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा हुआ है। साथ ही, प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि उनकी विचारधारा और सिद्धांत आज भी भाजपा के शासन के एजेंडे को आकार दे रहे हैं और "नए भारत" का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
मुखर्जी की 125वीं जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम को वीडियो संदेश के जरिए संबोधित करते हुए, मोदी ने उन्हें दूरदर्शी, देशभक्त और राष्ट्रीय एकता का समर्थक बताया। साथ ही, उन्होंने जनसंघ के संस्थापक के राजनीतिक संघर्षों और भाजपा के कई अहम नीतिगत फैसलों, जिनमें जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करना भी शामिल है, के बीच सीधा वैचारिक संबंध भी बताया।
मोदी ने कहा, "आज देश की धरती, पश्चिम बंगाल की धरती, अपने एक महान सपूत, एक महान देशभक्त, भारत की अखंडता के लिए समर्पित एक युगदृष्टा का श्रद्धापूर्वक स्मरण कर रही है।" उन्होंने राष्ट्रवादी नेता की विरासत के सम्मान के लिये पश्चिम बंगाल में नवगठित भाजपा सरकार की भी सराहना की।
प्रधानमंत्री ने कड़े राजनीतिक संदेश वाले अपने बयान में भारतीय जनता पार्टी के कई अहम वैचारिक पड़ावों को मुखर्जी की सोच से जोड़ा, खासकर अगस्त 2019 में केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर का विशेष संवैधानिक दर्जा खत्म करने के फैसले को।
मोदी ने कहा, "अनुच्छेद 370 को हटाकर हमने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा किया है।"
जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष संवैधानिक व्यवस्था के प्रति मुखर्जी के विरोध को याद करते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने एक देश के भीतर "दो संविधान, दो प्रमुख और दो प्रतीकों" की अवधारणा के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
संवैधानिक व्यवस्था के तहत राज्य को अपना संविधान बनाए रखने, अलग झंडा फहराने और अपने नेताओं के लिए अलग पदनाम इस्तेमाल करने की इजाजत थी – जैसे मुख्यमंत्री के बजाय प्रधानमंत्री और गवर्नर की जगह 'सदर-ए-रियासत'।
उन्होंने कहा, "डॉ. मुखर्जी अखंड भारत के नजरिये के लिए पूरी तरह समर्पित थे।"
उन्होंने देश को यह मंत्र दिया कि एक देश में ''दो विधान, दो प्रधान और दो निशान'' नहीं चलेंगे। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ एक नारा नहीं था; यह समान अधिकारों, समान संविधान और समान राष्ट्रीय चेतना का आह्वान था।"
जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे के खिलाफ आंदोलन के दौरान मुखर्जी की गिरफ्तारी और 1953 में हिरासत में उनकी मौत को याद करते हुए मोदी ने कहा कि जनसंघ के संस्थापक ने आखिर तक अपने विचारों के लिए लड़ाई लड़ी।
प्रधानमंत्री ने कहा, "उन्होंने अपने सिद्धांतों के लिए लड़ाई लड़ी, जेल गए और आखिरकार कश्मीर के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। आज हमारी सरकार को इस बात पर गर्व है कि अनुच्छेद 370 की दीवार को गिरा कर हमने डॉ. मुखर्जी का सपना पूरा किया है।"
भारत के बंटवारे के समय मुखर्जी की भूमिका का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि पूरे बंगाल को पाकिस्तान में मिलाने की कोशिश की गई थी, लेकिन जनसंघ के संस्थापक ने इसके खिलाफ जनमत तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।
मोदी ने कहा, "1947 में जब देश का विभाजन हुआ, लगभग तय हो चुका था, तब एक और संकट सामने था। पूरे के पूरे बंगाल को ही भारत से अलग करने की साजिशें रची जा रही थीं। तब डॉक्टर मुखर्जी इन साजिशों के सामने चट्टान बनकर खड़े हो गए। उन्होंने जनमत तैयार किया, राजनीतिक संघर्ष किया और यह सुनिश्चित किया कि पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न हिस्सा बना रहे और तब डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने हुंकार भरी थी। उनके शब्द थे, कांग्रेस ने देश का बंटवारा किया, और मैंने पाकिस्तान का ही बंटवारा कर दिया।"
मोदी ने जनसंघ के संस्थापक को याद करने में पश्चिम बंगाल की नयी भाजपा सरकार की भूमिका पर बार-बार जोर दिया और इसे "राष्ट्र प्रथम" की सोच के प्रति प्रतिबद्ध सरकार का संकेत बताया।
उन्होंने कहा, "कुछ दिन पहले ही 20 जून को भव्य तरीके से पश्चिम बंग दिवस का आयोजन किया गया था। यह बंगाल की धरती, बंगाल की विरासत को प्रणाम था। आज का यह कार्यक्रम अपनी विरासत के प्रति उसी सम्मान का हिस्सा है। मैं पश्चिम बंगाल सरकार को इतने भव्य कार्यक्रम के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। "
प्रधानमंत्री ने कहा कि ये बड़े पैमाने पर आयोजित समारोह उन राष्ट्रीय हस्तियों के सम्मान के प्रति एक व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिनके योगदान ने देश के राजनीतिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को आकार दिया है।
उन्होंने कहा, "आज का कार्यक्रम इस बात का सबूत है कि जब कोई सरकार 'राष्ट्र प्रथम' के लिए प्रतिबद्ध होती है, तो राष्ट्रीय नायकों का सम्मान किया जाता है और उनकी सोच के अनुरूप काम करने की हर संभव कोशिश की जाती है।"
मोदी ने बताया कि केंद्र सरकार मुखर्जी की 125वीं जयंती को दो साल तक चलने वाले राष्ट्रीय समारोह के तौर पर मना रही है।
उन्होंने कहा, "इसकी शुरुआत पिछले साल छह जुलाई को हुई थी और यह अगले साल छह जुलाई तक चलेगा।"
प्रधानमंत्री ने मुखर्जी के जीवन को इस बात का उदाहरण बताया कि कैसे दृढ़ विश्वास, विचारधारा की स्पष्टता और प्रतिबद्धता से किसी विचार को जन-आंदोलन में बदला जा सकता है।
उन्होंने कहा, "जहां विचारधारा की गहरी मजबूती, दृढ़ संकल्प और पूरी निष्ठा होती है, वहां उम्मीदें आखिरकार पूरी होती हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ऐसा ही जीवन जिया।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि मुखर्जी एक मजबूत वैकल्पिक आवाज के तौर पर तब उभरे, जब कांग्रेस के दौर में अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के लिए बहुत कम गुंजाइश थी।
उन्होंने कहा, "जिस समय जनसंघ की स्थापना हुई थी, तब हर तरफ कांग्रेस का ही बोलबाला था। उस समय एक तरह से अलग विचारधारा के लिये कोई जगह नहीं थी। तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उन सारी परिस्थितियों को चुनौती देते हुए एक नए विचार का साहस किया।"
मोदी के अनुसार, जनसंघ की स्थापना महज एक राजनीतिक दल को जन्म देने का काम नहीं था, यह लोकतंत्र में वैचारिक विविधता, राष्ट्रीय चिंतन और जनभागीदारी पर उनके अटूट विश्वास की अभिव्यक्ति थी।
मोदी ने उन कार्यकर्ताओं की पीढ़ियों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने मुखर्जी द्वारा रखी गई वैचारिक नींव को बनाए रखने और उसका विस्तार करने में मदद की।
उन्होंने कहा, "कोई भी विचार केवल स्थापना से अमर नहीं होता। विचार तब अमर होता है, जब पीढ़ियां उसे अपने जीवन से सींचती हैं। भारतीय जनसंघ के उस छोटे से दीये को जलाए रखने के लिए अनेक कार्यकर्ताओं ने अपना जीवन खपा दिया।"
मोदी ने जनसंघ से भाजपा तक सीधा संबंध जोड़ते हुए कहा, "वही भारतीय जनसंघ आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में लोगों की सेवा कर रहा है, जो दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकत है।"
उन्होंने कहा कि मुखर्जी के विचार न केवल आज के भारत में प्रासंगिक हैं, बल्कि देश के भविष्य को आकार देने में भी मदद कर रहे हैं।
मोदी ने कहा, "उनकी विचारधारा आज फल-फूल रही है और नए भारत को दिशा दे रही है।"
मुखर्जी की स्थायी विरासत पर भरोसा जताते हुए मोदी ने कहा कि भविष्य की पीढ़ियां, जो भाजपा के इतिहास का अध्ययन करेंगी, उनके योगदान को हमेशा मानती रहेंगी।
प्रधानमंत्री ने कहा, "मुझे पूरा भरोसा है कि जब आने वाली पीढ़ियां भारतीय जनता पार्टी का इतिहास लिखेंगी, तो वे निश्चित रूप से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सिद्धांतों, साहस और उनकी दूरदर्शी सोच का जिक्र करेंगी।"
भाषा प्रशांत अविनाश
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