विनेश फोगाट को दिए गए कारण बताओ नोटिस पर भारतीय कुश्ती महासंघ दो हफ्ते में फैसला करे: अदालत
मोना
- 06 Jul 2026, 05:29 PM
- Updated: 05:29 PM
नई दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) से कहा कि वह महिला पहलवान विनेश फोगाट को अनुशासनहीनता और डोपिंग-रोधी नियमों के उल्लंघन के आरोपों पर दिए गए कारण बताओ नोटिस पर दो हफ्ते में फैसला करे।
न्यायूमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने फोगाट की उस याचिका पर कार्यवाही बंद कर दी जिसमें कारण बताओ नोटिस के साथ-साथ भारतीय कुश्ती महासंघ की चयन संबंधी नीति और परिपत्र को चुनौती दी गई थी।
यह कार्यवाही तब बंद की गई जब कुश्ती महासंघ के वकील ने कहा कि एशियाई खेलों के चयन संबंधी में शामिल होने से जुड़ी उनकी शिकायत अब बेमानी हो गई है।
याचिका का निपटारा करते हुए न्यायाधीश ने आदेश दिया, ''दो हफ्ते के अंदर नौ मई के कारण बताओ नोटिस पर फैसला करें और याचिकाकर्ता तथा अदालत को इसकी जानकारी दें।'
भारतीय कुश्ती महासंघ के वकील ने कहा कि नोटिस पर फैसला लेने से पहले फोगाट को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा।
हालांकि, फोगाट की तरफ से वरिष्ठ वकील ने जोर देकर कहा कि याचिका में चयन संबंधी नीति से जुड़े 'बड़े मुद्दे' उठाए गए हैं, लेकिन अदालत ने कहा कि एथलीट को इसके लिए नई याचिका दायर करनी होगी।
अदालत ने कहा, ''इसे निपटाया जा सकता है और फिर आप एक नई रिट याचिका दायर कर सकते हैं।''
अदालत को बताया गया कि अदालती आदेशों के तहत फोगाट को एशियाई खेलों (एशियन गेम्स) के ट्रायल में हिस्सा लेने की इजाजत दी गई थी।
याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील ने बताया कि फोगाट को ट्रायल के दौरान उनके बर्ताव के लिए एक नया कारण बताओ नोटिस दिया गया।
अपनी याचिका में फोगाट ने भारतीय कुश्ती महासंघ की चयन नीति और परिपत्र को चुनौती दी थी, जिसमें एशियाई खेलों के ट्रायल में हिस्सा लेने की योग्यता को कुछ खास प्रतिस्पर्धा के मेडल विजेताओं तक सीमित कर दिया गया था।
भारतीय कुश्ती महासंघ ने डोपिंग रोधी नियमों के तहत संन्यास से लौटने वाले एथलीटों के लिए जरूरी छह महीने की नोटिस अवधि का हवाला देकर नौ मई को फोगाट को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और उन्हें 26 जून, 2026 तक घरेलू खेल प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था।
फोगाट ने आरोप लगाया कि भारतीय कुश्ती महासंघ ने खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया के लिए जो समय-सीमा निर्धारित की वह उनके गर्भावस्था और प्रसव उपरांत स्वास्थ्य लाभ के लिए पहले से अर्जित अवकाश के दौरान ही पड़ गई। इससे एक ऐसी 'सीमित और सख्त प्रणाली' बनी जो साफ तौर पर मनमानी और भेदभावपूर्ण थी।
एकल न्यायाधीश वाली पीठ ने 18 मई को कारण बताओ नोटिस जारी होने पर फोगाट को 'विस्तृत जवाब' देने की इजाजत दी। हालांकि, उसने एशियाई खेलों के ट्रायल में हिस्सा लेने के मामले में उन्हें कोई राहत देने से इनकार कर दिया।
एक खंड पीठ ने 22 मई को उन्हें एशियाई खेलों के ट्रायल में हिस्सा लेने को मंज़ूरी दे दी जिसे 30-31 मई को आयोजित किया गया था।
उच्चतम न्यायालय ने 29 मई को इस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया और उन्हें खेलने की इजाजत मिल गई।
महिलाओं की 53 किग्रा भार वर्ग की प्रतिस्पर्धा के तहत एक रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में मीनाक्षी गोयत से 4-6 से हारने के बाद फोगाट एशियाई खेलों के लिए चयन ट्रायल से बाहर हो गईं थीं।
भाषा
संतोष माधव मोना
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