अकाल तख्त सर्वोच्च, प्रत्येक सिख को इसके आदेश का पालन करना चाहिए : एसजीपीसी प्रमुख
सुभाष
- 05 Jul 2026, 11:29 PM
- Updated: 11:29 PM
अमृतसर, पांच जुलाई (भाषा) पंजाब के अमृतसर में रविवार को आयोजित एक 'पंथिक' सभा ने अकाल तख्त के उस आदेश को लागू करने का समर्थन किया, जिसमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु दोखी' (गुरु द्रोही) और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किया गया है।
यह सभा स्वर्ण मंदिर परिसर स्थित गुरुद्वारा मंजी साहिब दीवान हॉल में आयोजित की गई थी।
सभा के बाद पत्रकारों से बातचीत में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सिख समुदाय ने 15 जून के आदेश को पूरी तरह लागू करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि अकाल तख्त (सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था) की गरिमा और सर्वोच्चता पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता तथा इतिहास गवाह है कि जो भी सिख सिद्धांतों से भटका, उसे अंततः तख्त के समक्ष जवाब देना पड़ा।
पिछले महीने अकाल तख्त ने एक आपत्तिजनक वीडियो को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु दोखी' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किया था। मान ने हालांकि दावा किया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति वह नहीं हैं और आरोप लगाया कि दोषी ने उनके चेहरे जैसा मुखौटा पहना हुआ था।
अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने रविवार को सभा को संबोधित करते हुए सिख संस्थाओं के खिलाफ कथित अपमानजनक दुष्प्रचार किये जाने का आरोप लगाया।
गड़गज ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर सिख धर्म के खिलाफ टिप्पणी करने वालों को 10 दिनों के भीतर रोका जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''यदि यह नहीं रुका तो खालसा पंथ कार्रवाई करने में सक्षम है।''
एसजीपीसी अध्यक्ष धामी ने अपने संबोधन में कहा कि अकाल तख्त सिख धर्म का सर्वोच्च केंद्र है, जिसकी स्थापना छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब ने की थी, और हर सिख का कर्तव्य है कि वह इसके आदेशों का पालन करे।
उन्होंने कहा कि पंथ के अनुयायी अकाल तख्त के आदेशों की रक्षा के लिए एकजुट हैं और जो भी इसकी गरिमा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेगा, उसका विरोध किया जाएगा।
धामी ने कहा कि जिसने अहंकार त्यागकर तख्त के समक्ष समर्पण किया है, वही सच्ची आस्था का प्रतीक है।
अकाल तख्त ने जनवरी में मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु की गोलक' (गुरुद्वारा दानपेटी) पर टिप्पणी करने और एक कथित वीडियो में सिख गुरुओं तथा मारे गए चरमपंथी जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीरों से जुड़ी आपत्तिजनक गतिविधियों के आरोप में तलब किया था।
तख्त ने 15 जून को एक आदेश जारी कर उन्हें 'गुरु दोखी' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किया था। दावा किया गया था कि दो फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं ने उस कथित वीडियो को "प्रामाणिक" पाया है।
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