भारत, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल में तकनीकी मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करने के लिए तैयार: नड्डा
सुरेश
- 20 May 2026, 09:42 PM
- Updated: 09:42 PM
नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने बुधवार को कहा कि भारत बड़े पैमाने पर समान रूप से स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में ''नवाचार का केंद्र'' रहा है और साक्ष्य-आधारित सर्वोत्तम तरीकों के जरिये वैश्विक समुदाय को बहुत कुछ मुहैया करा सकता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश ने महिलाओं, बच्चों तथा किशोरों को अपनी सेवा मुहैया कराने तथा सतत विकास लक्ष्यों के केंद्र में रखा है।
नड्डा ने जेनेवा में 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान मातृ, नवजात एवं बाल स्वास्थ्य साझेदारी (पीएमएनसीएच) की बोर्ड अध्यक्ष हेलेन क्लार्क के साथ द्विपक्षीय बैठक से इतर ये टिप्पणियां कीं।
मंत्री ने अन्य देशों को तकनीकी मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करने की तत्परता व्यक्त की तथा पीएमएनसीएच को भौतिक और वर्चुअल मंचों के माध्यम से भारत के सफल मॉडल और नवाचारों को प्रदर्शित करने के लिए आमंत्रित किया।
मंत्री ने महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य के लिए वैश्विक एजेंडा को आगे बढ़ाने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए 2005 में अपनी स्थापना के बाद से पीएमएनसीएच के साथ भारत के लंबे जुड़ाव पर प्रकाश डाला और कहा कि देश संगठन के उद्देश्यों में सार्थक योगदान देना जारी रखने पर गर्व महसूस करता है।
नड्डा ने बैठक के दौरान कहा, ''भारत नवाचार का केंद्र रहा है और समानता तथा सुलभता के साथ व्यापक स्तर पर हस्तक्षेप करने में अग्रणी रहा है। हमने महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य को अपनी सेवा वितरण और सतत विकास के केंद्र में रखा है।''
नड्डा ने पीएमएनसीएच बोर्ड के उपाध्यक्ष और स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में भारत की सक्रिय नेतृत्वकारी भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि भारत द्वारा दिया जाने वाला 20 लाख अमेरिकी डॉलर का वार्षिक अनुदान स्थायी रूप से प्रक्रियाधीन है और जल्द ही इसकी जानकारी साझा की जाएगी।
नड्डा ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि देश में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में वैश्विक रुझानों से कहीं अधिक तेजी से महत्वपूर्ण कमी आई है।
नड्डा ने पीएमएनसीएच के उपाध्यक्ष के रूप में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य तथा गैर-संचारी रोगों के बढ़ते बोझ सहित कई प्राथमिकताओं में संगठन का समर्थन करने के लिए देश की तत्परता व्यक्त की।
भाषा यासिर सुरेश
सुरेश
2005 2142 दिल्ली