महक के रग्बी टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने जाने से उत्तराखंड में खुशी का माहौल
धीरज
- 20 May 2026, 09:36 PM
- Updated: 09:36 PM
देहरादून, 20 मई (भाषा) उत्तरकाशी जिले के दूरस्थ गांव भद्रासू की रहने वाली 20 वर्षीय महिला रग्बी खिलाड़ी महक चौहान ने अपने पहले ही सीनियर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' का पुरस्कार जीत लिया है ।
देश की सीनियर रग्बी टीम की सदस्य के तौर पर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने वाली प्रदेश की पहली रग्बी खिलाड़ी चौहान ने हाल में 16-17 मई को उज्बेकिस्तान के ताशकंद में आयोजित मध्य एशिया एवं दक्षिण एशिया (कासा) रग्बी 7 चैपियनशिप में महिला 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' का खिताब जीता है।
उत्तराखंड रग्बी एसोसिएशन के महासचिव और मुख्य कोच यशवंत सिंह ने इस पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि महक की इस सफलता ने खेल से जुड़े सभी लोगों का सिर ऊंचा कर दिया है।
उन्होंने कहा, ''इस टूर्नामेंट में महक ने बहुत स्कोर किया और भारत के लिए नौ बार ट्राय किया। इसकी गति भी बहुत तेज रही और इसी वजह से उन्हें इस सम्मान के लिण् चुना गया। पहली बार महक सीनियर में खेली थी और उनका प्रदर्शन शानदार रहा।''
सिंह ने कहा कि एशिया रग्बी द्वारा पहली बार यह टूर्नामेंट आयोजित किया गया था जिसमें भारत की पुरूष टीम दूसरे स्थान पर जबकि महिला टीम चौथे स्थान पर रही।
उन्होंने कहा कि 2023 में जब महक अपने दोस्तों के साथ रूड़की के रग्बी कैंप में आयी थी तो इसकी दौड़ने की गति देखकर हमने उससे रग्बी खेलने को कहा। उन्होंने कहा, ''शुरू में तो उसने बेमन से रग्बी खेला लेकिन बाद में उसे खुद आनंद आने लगा।''
सिंह ने कहा कि ऐसी सफलताओं से लोग बच्चे प्रेरित होते हैं और महक के स्कूल से ही 50-60 बच्चे रग्बी खेलने आ रहे हैं।
ताशकंद से लौटने के बाद महक ने कहा कि उन्हें अपनी सफलता पर गर्व तो है लेकिन उन्हें अपनी इस सफलता पर और खुशी होती अगर उनकी टीम भी पदक जीतती।
महक ने 'पीटीआई भाषा' से बातचीत में कहा,'' मेरा मुख्य लक्ष्य अपनी टीम को पदक दिलाना था जो पूरा नहीं हो पाया।''
उन्होंने कहा कि अगली बार वह अपनी टीम को पदक दिलाने के लिए और जोर शोर से जुटेंगी।
महक ने कहा, ''अब मेरा पूरा ध्यान रग्बी खेलने और उसे ऊंचाइयों पर पहुंचाने पर ही है।''
एक सवााल के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें देखकर और भी बच्चे प्रेरित होंगे क्योंकि रग्बी खेलने से मुझे इतना बड़ा मौका मिला। उन्होंने कहा, '' मैं उत्तराखंड की पहली खिलाड़ी हूं जिसने सीनियर टीम में शामिल होकर कोई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेला हो।''
भाषा दीप्ति
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2005 2136 देहरादून