न्यायालय ने धोखाधड़ी के मामलों को समेकित करने की याचिका खारिज की
पवनेश
- 08 May 2026, 10:30 PM
- Updated: 10:30 PM
नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) पीड़ित-केंद्रित न्यायिक दृष्टिकोण को समय की आवश्यकता बताते हुए, उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को दुबई निवासी एक व्यवसायी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उत्तराखंड, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में उसके खिलाफ दर्ज 24 आपराधिक मामलों को समेकित करने तथा उन्हें दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया था।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने समीर अग्रवाल द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया और पूछा कि क्या अदालत को उसका भव्य स्वागत करना चाहिए और उसकी कथित धोखाधड़ी एवं जालसाजी के पीड़ितों को उसकी सुविधा के लिए मुकदमे में शामिल होने के वास्ते दिल्ली आने के लिए मजबूर करना चाहिए।
बड़े धोखाधड़ी मामलों में प्राथमिकियों को समेकित करने के शीर्ष अदालत के पूर्व के फैसलों पर नाराजगी जताते हुए पीठ ने कहा कि पीड़ित-केंद्रित न्यायिक दृष्टिकोण के बजाय, प्राथमिकियों के समेकन और त्वरित सुनवाई के नाम पर आरोपी-समर्थक फैसले पारित किए जा रहे हैं।
पीठ ने कहा कि धोखाधड़ी का हर मामला अलग और विशिष्ट होता है क्योंकि पीड़ित एवं धोखाधड़ी से प्राप्त राशि अलग-अलग होते हैं, तथा आरोपी निश्चित रूप से वही रहता है।
इसने कहा कि जांच के लिए प्राथमिकियों को समेकित नहीं किया जा सकता, और ''धोखाधड़ी के ऐसे शिकार न्यायिक प्रणाली के अदृश्य शिकार भी हैं, जिसने उनके बारे में सोचा ही नहीं।''
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''क्या यह उचित है कि आप अपने अपराध के पीड़ितों से कहें कि वे कर्नाटक, बिहार और केरल जैसे विभिन्न स्थानों से दिल्ली आकर आपकी जमानत का विरोध करें?''
उन्होंने कहा, ''आप उच्चतम न्यायालय रजिस्ट्री में 1,000 करोड़ रुपये जमा करें और हम पीड़ितों को यात्रा तथा अच्छे होटलों में ठहरने के लिए धन देंगे, तब हम इस पर विचार कर सकते हैं।''
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''पीड़ित-केंद्रित न्यायिक दृष्टिकोण समय की आवश्यकता है।''
पीठ ने कहा कि यद्यपि वह मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है, फिर भी आरोपी को पहले आत्मसमर्पण करना चाहिए और उसके बाद ऐसी राहत की मांग करनी चाहिए।
उत्तराखंड, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की अदालतों में अग्रवाल के खिलाफ धोखाधड़ी तथा जालसाजी के अपराधों से संबंधित 24 आपराधिक मामले लंबित हैं।
भाषा
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