न्यायालय ने आरटीई के तहत छात्रों के अनिवार्य दाखिले को सही ठहराया, इसे 'राष्ट्रीय मिशन' बताया
पवनेश
- 28 Apr 2026, 07:09 PM
- Updated: 07:09 PM
नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) पूर्व-प्राथमिक कक्षा में प्रवेश को एक 'राष्ट्रीय मिशन' के तौर पर लिए जाने की जरूरत बताते हुए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के तहत ''पड़ोस के स्कूलों'' की संवैधानिक और कानूनी तौर पर यह जिम्मेदारी है कि वे राज्य सरकार द्वारा आवंटित छात्रों को बिना देरी के दाखिला दें।
आरटीई की रूपरेखा के तहत आवंटित छात्रों को बिना किसी देरी के प्रवेश देने की आसपास के निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की जिम्मेदारी को दोहराते हुए, न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि इस तरह के प्रवेश से इनकार करना संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत प्रदत्त शिक्षा के मौलिक अधिकार को कमज़ोर करता है।
फैसले में कहा गया, ''आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 12 के तहत, हमारे समाज के कमजोर और वंचित वर्गों से आने वाले बच्चों को कक्षा की कुल संख्या के पच्चीस प्रतिशत तक प्रवेश देने की 'पड़ोस के स्कूल' की जिम्मेदारी में हमारे समाज की सामाजिक संरचना को बदलने की असाधारण क्षमता है।''
पीठ ने कहा कि इसका ईमानदारी से पालन करना सचमुच बदलाव लाने वाला हो सकता है, और यह न केवल युवा भारत को शिक्षित करने की दिशा में एक कदम है, बल्कि 'दर्जे की समानता' के प्रस्तावना के उद्देश्य को हासिल करने की दिशा में भी एक ठोस कदम है।
उसने कहा, ''अनुच्छेद 21ए के तहत अधिकार की संवैधानिक घोषणा, जिसके बाद अधिनियम की धारा 3 के तहत मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का वैधानिक आदेश है, उसे केवल अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी पालन से ही साकार किया जा सकता है।''
पीठ ने लखनऊ पब्लिक स्कूल, एल्डिको द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया; जिसने उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसे समाज के कमजोर वर्ग के एक छात्र को प्रवेश देने का निर्देश दिया गया था।
यह मामला तब सामने आया जब 'उत्तर प्रदेश बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार नियम, 2011' के तहत, 2024-25 सत्र के लिए पूर्व-प्राथमिक कक्षा में प्रवेश के लिए एक छात्र को लखनऊ पब्लिक स्कूल आवंटित किया गया।
छात्र का विधिवत चयन होने और उसका नाम आधिकारिक सरकारी सूची में शामिल होने के बावजूद, स्कूल ने उसकी पात्रता को लेकर 'अनिश्चितता' का हवाला देते हुए उसे प्रवेश देने से इनकार कर दिया।
भाषा वैभव पवनेश
पवनेश
2804 1909 दिल्ली