देश में संविधान की भावना के अनुरूप समावेशी विकास हो : विभिन्न दलों के सदस्यों का सुझाव
माधव वैभव
- 17 Dec 2024, 06:36 PM
- Updated: 06:36 PM
नयी दिल्ली, 17 दिसंबर (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने कहा कि देश का संविधान किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव का पक्षधर नहीं है तथा संविधान की भावना के अनुसार देश में समावेशी विकास कर समाज के सभी वर्गों तक विकास का लाभ पहुंचाया जाए।
राज्यसभा में ‘भारत के संविधान की 75 साल की गौरवशाली यात्रा’ विषय पर चर्चा में भाग लेते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के संदोष कुमार पी ने कहा कि भारत का संविधान देश की आजादी की लड़ाई से जन्मा है।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी भाकपा ने हमेशा प्रगतिशील कानूनों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि भाकपा निजी क्षेत्र में आरक्षण और मतपत्रों के जरिये चुनाव करवाने की मांग की समर्थक है।
संदोष ने दावा किया कि जब संविधान बन रहा था तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने उसका विरोध किया था। उन्होंने कहा कि आरएसएस से जुड़े संसद के सदस्यों को बताना चाहिए कि वे संगठन के उस रुख के बारे में क्या मानते हैं?
तृणमूल कांग्रेस के मोहम्मद नदीमुल हक ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि कामकाजी पंथनिरपेक्षता की झलक तृणमूल कांग्रेस की टीम में मिलती है। उन्होंने कहा कि आज सबसे अधिक हमले पंथनिरपेक्षता पर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता बताएं कि वे पंथनिरपेक्षता की रक्षा के लिए क्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस साल नफरत से जुड़े अपराध के मामलों में 60 प्रतिशत का इजाफा हुआ है जबकि भाजपा शासित राज्यों में यह 70 प्रतिशत से अधिक है।
कांग्रेस के चंद्रकांत हंडोर ने कहा कि यदि देश में संविधान और लोकतंत्र को मजबूत करना है तो सभी को आपसी मतभेद दूर करके साथ में आना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आज सदन में विविधता में एकता का जो नजारा देखने को मिल रहा है, वह संविधान की ही देन है।
आम आदमी पार्टी के विक्रमजीत सिंह साहनी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि संविधान लागू हुए 75 वर्ष होने के बावजूद देश में उत्पीड़न की घटनाएं सामने आती हैं और महिलाओं के साथ अपराध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में समावेशी विकास होना चाहिए।
शिवसेना (उबाठा) के संजय राउत ने कहा कि सत्ता पक्ष की ओर से संविधान के प्रति जो चिंता जतायी जा रही है, उसे देखकर उनके मन में संविधान को लेकर चिंता हो रही है।
उन्होंने कहा कि यदि लोकसभा चुनाव में भाजपा का ‘400 पार’ का नारा पूरा हो जाता तो आज संविधान बदल जाता और आज सदन में इस विषय पर चर्चा होती कि संविधान बदलना क्यों आवश्यक हो गया?
राउत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में संविधान पर चर्चा का जवाब दिया था और उसमें समाज को भ्रष्टाचार मुक्त करने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष जब भ्रष्टाचार को लेकर चिंता जताये तो समझ लीजिए कि कुछ गड़बड़ होने वाला है।
निर्दलीय अजीत कुमार भुइयां ने कहा कि संविधान ही इस पूरे देश को बांधता है। उन्होंने कहा कि वह पूर्वोत्तर राज्य से आते हैं और इस क्षेत्र के लोगों में संविधान के कारण ही यह भरोसा है कि उन्हें भी सभी अधिकार प्राप्त हैं जो अन्य नागरिकों को मिले हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर राज्य के लोगों के साथ जो भी वादे किए गए थे, वे सभी तोड़े गये हैं तथा मणिपुर हिंसा इसका ज्वलंत उदाहरण है।
भाजपा के मनन कुमार मिश्र ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि संविधान के माध्यम से देश ने कानून के शासन एवं न्यायपालिका के लिए प्रतिबद्धता जतायी है। उन्होंने कहा कि 1970 के दशक के मध्य में देश में काफी उथल-पुथल रही क्योंकि नागरिकों को विकास का लाभ नहीं मिल पा रहा था।
उन्होंने कहा कि आपातकाल में देश के सभी प्रमुख विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया था। उन्होंने कहा, ‘‘आज इस किताब (संविधान) को कोई खतरा नहीं है, इस पर 1970 के दशक में खतरा पैदाहुआ था।’’
मिश्र ने कहा कि उनके सपने में भी भगवान शिव आए थे और उन्होंने कहा कि दो भाई-बहन संविधान की प्रति लेकर घूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिवजी ने उनसे कहा कि वह जनता को जाकर यह बता दें कि वे भाई-बहन की बात पर भरोसा नहीं करें, संविधान पर कोई खतरा नहीं है।
उनका परोक्ष इशारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की ओर था।
कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने कहा कि संविधान को लेकर सदन में सार्थक बहस होनी चाहिए थी किंतु इसमें केवल आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्या प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह ने कुछ नहीं किया और क्या उन्होंने सिर्फ गलत काम ही किए थे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कह चुके हैं कि देश के विकास में हर प्रधानमंत्री का योगदान है।
शुक्ला ने कहा कि हमें बेरोजगारी, महिलाओं और युवाओं के बारे में बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकारों पर मन पसंद के न्यायाधीश उच्च न्यायपालिका में नियुक्त करने के आरोप लगाये गये किंतु क्या वर्तमान सरकार में ऐसा नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि आज न्यायपालिका की स्वतंत्रता के बारे में कोई बात नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि संविधान पर दोबारा चर्चा होनी चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष ने संविधान में संप्रभुता की गारंटी की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि जब नागरिकों को यह बताया जाए कि वे क्या पहनें और क्या खाएं तो फिर उनकी संप्रभुता कहां रह गयी।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की सरकार के साथ आज भेदभाव किया जा रहा है।
समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने चर्चा में लेते हुए कहा कि आपातकाल पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लगाया था तो उन्होंने ही इसे हटाया भी था।
सपा नेता ने दावा किया कि आज देश में अघोषित आपातकाल लागू है। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में पंथनिरपेक्षता और समाजवाद का विरोध करने वाले लोग इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि उनके विरोध का कोई अर्थ नहीं है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के संभल में पिछले दिनों हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि देश के बड़े राज्य में अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया।
चर्चा में भाग लेते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले ने एक स्वरचित कविता से अपनी बात की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार देश में संविधान को मजबूत करेगी।
तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि भारत का संविधान एक जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने राज्य के किसानों के लिए कई दिन तक हड़ताल की थी।
उन्होंने सरकार से पूछा कि वह लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी कब बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने आयुष्मान योजना का विचार पश्चिम बंगाल की ममता सरकार की ऐसी ही एक योजना से लिया है किंतु राज्य की जो योजना है, उसमें कार्ड महिला के नाम पर बनाया जाता है।
डेरेक ने कहा कि केंद्र की सरकार ‘सहकारी संघवाद’ की भले ही बात करती हो, किंतु व्यवहार में वह राजनीतिक संघवाद का पालन करती है। उन्होंने कहा कि केंद्र की वर्तमान सरकार ने पश्चिम बंगाल के साथ भेदभाव किया है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब उसने तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लिया तो उस समय विपक्ष को कुछ क्यों नहीं बोलने दिया?
चर्चा में आईयूएमएल के हारिस बीरन, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की फौजिया खान, भाजपा के दिनेश शर्मा, तृणमूल कांग्रेस के रीताब्रता बनर्जी, केरल कांग्रेस (एम) के जोस के मणि, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी, भारत राष्ट्र समिति के के. सुरेश रेड्डी, शिवसेना (उबाठा) की प्रियंका चतुर्वेदी, भाकपा के पी पी सुनीर और तेलुगु देशम पार्टी के साना सतीश बाबू ने संविधान के प्रावधानों की सराहना करते हुए कहा कि इसके अनुसार अल्पसंख्यकों और महिलाओं सहित समाज के सभी वर्गों का विकास होना चाहिए। अधिकतर सदस्यों ने संविधान बनाने में डॉ भीमराव आंबेडकर की भूमिका की सराहना की।
भाषा माधव