सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सहकारी ‘डाटाबेस’ जारी किया
राजेश राजेश रमण
- 08 Mar 2024, 08:30 PM
- Updated: 08:30 PM
नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं का ‘डाटाबेस’ (आंकड़े) जारी किया यह देश में सहकारी समितियों के विस्तार और विकास में मदद करेगा।
देश में आठ लाख से अधिक पंजीकृत समितियां हैं, जिनसे 30 करोड़ से अधिक लोग जुड़े हुए हैं।
राष्ट्रीय सहकारी ‘डाटाबेस’ एक वेब-आधारित डिजिटल डैशबोर्ड है जिसमें राष्ट्रीय एवं राज्य संघों सहित सहकारी समितियों के आंकड़ों को शामिल किया गया है। इसने आठ लाख सहकारी समितियों के बारे में जानकारी एकत्र की गई है।
इस मौके पर समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय लाखों लोगों को देश की अर्थव्यवस्था और विकास से जोड़ने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सहकारी ‘डाटाबेस’ सहकारी समितियों के विस्तार, डिजिटल विकास और ‘डाटाबेस’ के माध्यम से वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मंत्री ने कहा कि आंकड़ा विकास को सही दिशा में निर्देशित करने का काम करता है और खामियों का विश्लेषण करने में अत्यधिक प्रभावी होगा।
शाह ने कहा कि ‘डाटाबेस’ में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) को शीर्ष, गांवों को शहरों, मंडियों को वैश्विक बाजार और राज्य डाटाबेस को अंतरराष्ट्रीय ‘डाटाबेस’ से जोड़ने की क्षमता है।
उन्होंने बताया कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण के साथ सहकारी समितियों के विस्तार का जो अभियान शुरू किया है, उसमें यह ‘डाटाबेस’ मार्ग प्रशस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
शाह ने कहा कि इस मंच की मदद से देश भर में पंजीकृत सहकारी समितियों के बारे में सारी जानकारी एक बटन के क्लिक पर उपलब्ध होगी।
उन्होंने कहा कि इस डाटाबेस में आंकड़ों की प्रामाणिकता और इसके नियमित अद्यतन करना, एक व्यापक वैज्ञानिक प्रणाली के माध्यम से सुनिश्चित किए जाते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि सहकारिता मंत्रालय यह सुनिश्चित करेगा कि इस पर केवल सत्यापित आंकड़े ही नियमित रूप से अपलोड किये जाएं।
इस अवसर पर शाह ने 'राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस 2023: एक रिपोर्ट' भी जारी की।
उन्होंने कहा कि 1960 के दशक के बाद यह महसूस किया गया कि एक राष्ट्रीय नीति के तहत हर राज्य के सहकारी आंदोलनों के बीच समन्वय की आवश्यकता है।
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साहसिक निर्णय लेते हुए सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर इसे अंजाम तक पहुंचाया।
मंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में देश के सभी पैक्स को कम्प्यूटरीकृत कर दिया गया है और सभी राज्यों ने अपना कारोबार बढ़ाने के लिए सामान्य उपनियमों को स्वीकार कर लिया है।
शाह ने यह भी उल्लेख किया कि मोदी सरकार ने परामर्श के रूप में मॉडल उपनियम बनाए हैं, जिसके तहत पैक्स बहुआयामी बन गए हैं और विभिन्न कार्य कर सकते हैं।
राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस को तीन चरणों में पूरा किया गया है।
पहले चरण में, तीन क्षेत्रों - प्राथमिक कृषि ऋण सोसायटी, डेयरी और मत्स्य पालन में लगभग 2.64 लाख समितियों की मैपिंग पूरी की गई।
दूसरे चरण में, विभिन्न राष्ट्रीय संघों, राज्य संघों, राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी), जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी), शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी), राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (एससीएआरडीबी), प्राथमिक कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (पीसीएआरडीबी), सहकारी चीनी मिलों, जिला यूनियनों और बहु-राज्य सहकारी समितियों (एमएससीएस) के आंकड़ों को एकत्र किया गया है।
तीसरे चरण में अन्य क्षेत्रों की शेष सभी आठ लाख प्राथमिक सहकारी समितियों का डेटा मैपिंग किया गया।
भाषा राजेश राजेश