हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए भीड़ एकत्र हुई थी, अंकित शर्मा पर लगातार हमला किया गया: अदालत
सुरेश
- 14 Jul 2026, 09:07 PM
- Updated: 09:07 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में सुनाये गए अपने फैसले में कहा है कि आम आदमी पार्टी (आप) का पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन हथियारों से लैस उस भीड़ का हिस्सा था, जो ''हिंदुओं के प्रति नफरत'' की भावना के साथ दंगा, लूटपाट और आगजनी करने के लिए एकत्र हुई थी।
अदालत ने मामले में हुसैन को दोषी करार देते हुए यह भी कहा कि भीड़ ने ''बहुत ही बेरहमी से और लगातार हमले'' करके शर्मा की हत्या की थी।
हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने हुसैन और अन्य दोषियों को आपराधिक साजिश (भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी) के आरोप से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि गैर-कानूनी भीड़ द्वारा किये गए अपराधों के लिए उसने उकसाया था।
न्यायाधीश ने कहा कि इलाके में खराब पड़े और दूसरी तरफ घुमाए गए सीसीटीवी कैमरों से संकेत मिलता है कि ''शायद कोई साजिश रची जा रही थी'', लेकिन अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि ऐसी साजिश कब, कहां और कैसे रची गई थी।
मंगलवार को उपलब्ध हुए, 13 जुलाई के 320 पृष्ठों के विस्तृत आदेश में अदालत ने कहा कि गैर-कानूनी भीड़ के सदस्यों ने शर्मा को घेर लिया और उन्हें घसीटते हुए चांद बाग पुलिया की ओर ले जाया गया। बाद में उनका शव वहीं एक नाले में मिला।
अदालत ने 11 आरोपियों में से छह को बरी कर दिया है।
आदेश में कहा गया है, ''ताहिर हुसैन उस बड़ी और गैर-कानूनी भीड़ का हिस्सा था, जो हिंदुओं के प्रति नफरत की भावना के साथ चांद बाग पुलिया पर एकत्र हुई थी। इस भीड़ का मकसद दंगे करना, लूटपाट और आगजनी करना तथा हिंदू समुदाय के लोगों की संपत्ति को और उन्हें नुकसान पहुंचाना था।''
अदालत ने कहा कि भीड़ हथियारों से लैस थी, उसने हिंसा की और दंगा, आगजनी एवं लूटपाट भी की। साथ ही, अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा कि गैर-कानूनी भीड़ में शामिल लोगों को पता था कि अपने साझा मकसद को पूरा करने के दौरान ''किसी की मौत हो सकती है या कोई मारा जा सकता है।''
अदालत ने कहा, ''यह साबित हो चुका है कि भीड़ के सदस्यों ने अंकित शर्मा को घेर लिया था और उन्हें घसीटकर चांद बाग पुलिया की तरफ ले जाया गया, इस तरह उनका अपहरण हो गया। इसके बाद, उन पर बेरहमी से और लगातार हमला करके उनकी हत्या कर दी गई।'' अदालत ने सजा पर बहस के लिए इस मामले को 23 जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
न्यायाधीश ने कहा कि हुसैन उस भीड़ का हिस्सा था, जो उस इलाके में लागू दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 का उल्लंघन करते हुए जमा हुई थी। अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188 (सरकारी अधिकारी के आदेश का पालन न करना) के तहत दोषी करार दिया।
अदालत ने कहा, ''इस गैरकानूनी भीड़ का सदस्य होने के कारण, आरोपी ताहिर हुसैन भारतीय दंड संहिता की धारा 149 के तहत उपरोक्त अपराधों के लिए परोक्ष रूप से जिम्मेदार है। अदालत ने हुसैन को आईपीसी की धारा 302, 365, 147, 148, 153ए और 188 के तहत दोषी करार दिया, जिन्हें धारा 149 के साथ पढ़े जाने की बात कही।
अदालत ने हुसैन को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 365 (किसी व्यक्ति को गुप्त रूप से और गलत तरीके से बंधक बनाने के इरादे से अगवा करना), धारा 149, 147 (दंगा करने के लिए सजा), 148 (घातक हथियार के साथ दंगा करना), 153ए (वैमनस्य को बढ़ावा देना) और 188 (सरकारी अधिकारी के आदेश का पालन न करने) के तहत दोषी करार दिया।
अदालत ने नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भी इन्हीं अपराधों के लिए दोषी करार दिया। अदालत ने पाया कि ये लोग उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने आईबी अधिकारी शर्मा को घेर लिया था और उनपर जानलेवा हमला करने से पहले उन्हें चांद बाग पुलिया की तरफ घसीट कर ले गए थे। इस वजह से आईपीसी की धारा 149 के तहत हत्या और अन्य अपराधों के लिए भी वे लोग जिम्मेदार हैं।
अदालत ने मामले में हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, फिरोज, गुलफाम, सोएब, समीर खान, मुंतजिम उर्फ मूसा को बरी कर दिया।
भाषा सुभाष सुरेश
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