केंद्र ने बंगाल में पीएमएवाई के तहत एक लाख ग्रामीण मकानों को दी मंजूरी
नरेश
- 14 Jul 2026, 06:35 PM
- Updated: 06:35 PM
कोलकाता, 14 जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को घोषणा की कि केंद्र ने सर्वेक्षण कार्य और भौतिक सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक लाख ग्रामीण मकानों के निर्माण को पूर्व मंजूरी दे दी है।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य ने 'वीबी-जी राम जी' योजना के तहत 125 दिनों के गारंटीशुदा रोजगार के लिए 2.56 करोड़ जॉब कार्ड धारकों की पहचान करके उन्हें मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि साथ ही, अतिरिक्त आवेदनों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने और उन्हें मंजूरी देने के लिए केंद्र से सैद्धांतिक सहमति भी मिल गई है।
ये घोषणाएं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के बीच सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद की गईं। बैठक में अधिकारी के अलावा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष, अन्य विभागों के मंत्री तथा राज्य और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
चौहान ने कहा, ''बंगाल में ग्रामीण आवास योजना के लिए सर्वेक्षण कार्य तेजी से किया जा रहा है और इसके बाद अनिवार्य भौतिक सत्यापन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हमने एक लाख मकानों के निर्माण को पूर्व मंजूरी दे दी है, ताकि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद मकानों का निर्माण शुरू करने में कोई समय न लगे।''
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ये मंजूरियां राज्य में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2,400 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए पहले से आवंटित 1,000 करोड़ रुपये और मनरेगा के लिए दिए गए 700 करोड़ रुपये के अतिरिक्त हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किए गए वादों के अनुरूप हमने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को रोजगार, पेट भरने के लिए भोजन और सिर पर छत देने का संकल्प लिया था।''
उन्होंने कहा, ''आज की बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री से मिले दिशा-निर्देशों की बदौलत हमने उन तीन वादों में से कम से कम दो को पूरा करने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाया है।''
उन्होंने कहा कि मानसून से जुड़ी बाधाओं को देखते हुए ग्रामीण आवास योजना के लिए सर्वेक्षण और सत्यापन की समयसीमा 20 जुलाई से बढ़ाकर 15 अगस्त कर दी गई है।
चौहान ने कहा कि ग्रामीण कल्याण मंत्रालय ने 31 मार्च, 2027 तक नौ महीने की अवधि के लिए पश्चिम बंगाल के गांवों के विकास हेतु 8,508 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के योगदान को मिलाकर इस योजना का कुल परिव्यय 12,064 करोड़ रुपये से अधिक होगा।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा, ''पिछली सरकार के कार्यकाल में जब मैं बंगाल आया था, तो मेरा दिल दुखा था और आत्मा व्यथित हुई, क्योंकि केंद्र के साथ सहयोग नहीं करने के कारण लोगों को 82,492 करोड़ रुपये की स्वीकृत योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका। इन योजनाओं पर काम काफी पहले शुरू हो गया था, लेकिन वे कभी पूरी नहीं हो सकीं।''
उन्होंने कहा, ''मुझे प्रसन्नता है कि शुभेंदु अधिकारी सरकार के तहत अब वे बाधाएं दूर कर दी गई हैं और बंगाल की विकास प्रक्रिया को अब तेज किया जा सकता है।''
चौहान ने कहा कि राज्य के लिए कृषि रूपरेखा तैयार करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और राज्य के विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों के सहयोग से प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मंगलवार की बैठक में इसकी पहली प्रस्तुति दी गई।
उन्होंने कहा, ''इस परियोजना में राज्य की कृषि-जलवायु परिस्थितियों, मिट्टी की प्रकृति और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए फसलों के चयन और उनकी बेहतर पैदावार के लिए सुझाव दिए जाएंगे।''
चौहान ने कहा, ''बंगाल को पूरे पूर्वी भारत में बीज विकास का केंद्र बनाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।'' उन्होंने बताया कि राज्य की दो प्रमुख फसलों-जूट और आलू-के बीज अभी बाहर से लाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि नाबार्ड और बैंकों की सहायता से जल्द ही ग्रामीण बंगाल में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के लिए आवेदन को लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य में 12 लाख किसान क्रेडिट कार्ड धारक हैं।
अधिकारी ने घोषणा की कि बंगाल के चार जिलों-दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार, झाड़ग्राम और पुरुलिया को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि यह योजना देश के 100 कम प्रदर्शन करने वाले जिलों में बदलाव लाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक व्यापक कृषि पहल है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''अब हमें केंद्र की मंजूरी मिल गई है कि राज्यभर में चार कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इनमें एक चिंसुराह में चावल और दूसरी मालदा में आम के लिए होगी। साथ ही इसके लिए 100 करोड़ रुपये का अग्रिम आवंटन भी होगा।''
भाषा अमित नरेश
नरेश
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