मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक स्तर पर समान कानूनों और प्रक्रियाओं की जरूरत : अमित शाह
प्रशांत
- 15 May 2026, 10:45 PM
- Updated: 10:45 PM
(तस्वीर के साथ)
(अभिषेक शुक्ला)
नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को रेखांकित किया कि मादक पदार्थों की तस्करी, और इसके सरगनाओं के प्रत्यर्पण और खुफिया जानकारी साझा करने के लिए वैश्विक स्तर पर समान कानून और प्रक्रिया की आवश्यकता है।
शाह ने रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) द्वारा आयोजित आर एन काव स्मारक व्याख्यान-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 2047 तक नशामुक्त होने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
यह व्याख्यान रॉ के संस्थापक रामेश्वर नाथ काव की स्मृति में आयोजित किया जाता है।
शाह ने 'मादक पदार्थ: एक सर्वव्यापी खतरा, एक सामूहिक जिम्मेदारी' विषय पर अपने संबोधन में कहा कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने मादक पदार्थों के गिरोहों को खत्म करने के लिए एक खाका तैयार किया है।
रॉ के मुख्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में 40 से अधिक देशों के राजदूतों, उच्चायुक्तों और राजनयिकों ने हिस्सा लिया।
शाह ने कहा कि सभी जिम्मेदार देशों के पास अब भी मादक पदार्थों के खतरे को हराने के लिए मिलकर काम करने का समय है।
उन्होंने आगाह किया कि यदि अब संयुक्त प्रयास शुरू नहीं किए गए, तो दस साल बाद दुनिया को एहसास होगा कि तब तक बहुत देर हो चुकी होगी और इसके द्वारा किए गए नुकसान को ठीक करना संभव नहीं होगा।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ''दुनिया को एक साथ मादक पदार्थों के नेटवर्क और मादक पदार्थों से जुड़े आतंकवादी राष्ट्रों, दोनों से लड़ना होगा। इस लड़ाई में, दुनिया को प्रतिबंधित पदार्थों की एक समान परिभाषा, मादक पदार्थों की तस्करी के लिए मानकीकृत दंड, मादक पदार्थों के सरगनाओं के प्रत्यर्पण और खुफिया जानकारी साझा करने के लिए एकसमान कानून अपनाने होंगे।''
उन्होंने कहा कि जब तक विनियमित पदार्थों के रूप में नामित किए जाने वाले पदार्थों पर वैश्विक स्तर पर उच्च स्तर का सामंजस्य नहीं होता है, साथ ही मादक पदार्थों की तस्करी के लिए समान मानक दंड निर्धारित नहीं होते हैं, तब तक गिरोह नीति में विसंगतियों का फायदा उठाते रहेंगे, जिससे लड़ाई कमजोर होती जाएगी।
शाह ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि मादक पदार्थों की खेप को रोकने और मादक पदार्थ तस्करी गिरोह के सरगनाओं को गिरफ्तार करने और निर्वासित करने के लिए वास्तविक समय की खुफिया जानकारी साझा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने इस बात पर आम सहमति की आवश्यकता को रेखांकित किया कि मादक पदार्थों के खिलाफ युद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और 'नार्को-देशों'' को वैकल्पिक शक्ति केंद्र बनने से रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।
शाह ने उपस्थित राजदूतों और राजनयिकों से मादक पदार्थों के खिलाफ युद्ध में भारत के प्रयासों में शामिल होने की अपील की।
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि मादक पदार्थों के प्रति भारत की ' कतई बर्दाश्त नहीं' नीति के तहत, देश यह सुनिश्चित करेगा कि एक ग्राम मादक पदार्थ देश में प्रवेश न कर सके या भारत को पारगमन मार्ग के रूप में उपयोग करके देश से बाहर न जा सके।
उन्होंने रेखांकित किया कि मादक पदार्थों की तस्करी केवल पुलिस या संबंधित एजेंसियों द्वारा निपटाए जाने वाला कानून -व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह समाज और आने वाली पीढ़ियों पर दीर्घकालिक प्रभाव डालने वाला मुद्दा है।
शाह ने कहा कि हालांकि इस बात की जानकारी है कि मादक पदार्थों से अर्जित धन का इस्तेमाल आतंकवादियों और आपराधिक नेटवर्क को वित्त पोषित करने और समानांतर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है, लेकिन जिस बात पर बड़े पैमाने पर ध्यान नहीं दिया जाता है वह है मादक पदार्थों के दुरुपयोग से मानव शरीर को स्थायी नुकसान होता है।
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में, मित्र देशों के सहयोग से भारत 40 से अधिक अंतरराष्ट्रीय अपराधियों को वापस भारत लाने में सफल रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अभी बहुत कुछ करना बाकी है।
शाह कहा कि आठ अरब की आबादी, 195 देशों और 250,000 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं वाले विश्व में खंडित दृष्टिकोणों के साथ मादक पदार्थों की समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों के खिलाफ युद्ध को भू-राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर लड़ना होगा और इसे सामूहिक संकल्प, खुफिया जानकारी साझा करने, समन्वित कार्रवाई और सीमा पार अभियानों के साथ लड़ा जाना चाहिए।
इस कार्यक्रम में काव के परिवार के सदस्यों, रॉ के पूर्व सचिवों, राजनयिकों और भारतीय सुरक्षा तंत्र के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
भाषा धीरज प्रशांत
प्रशांत
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