किसानों के मार्च के लिये अनुमति नहीं दी गई थी: चंडीगढ़ पुलिस
प्रशांत
- 16 May 2026, 12:14 AM
- Updated: 12:14 AM
चंडीगढ़, 15 मई (भाषा) चंडीगढ़ पुलिस ने शुक्रवार को पंजाब के प्रदर्शनकारी किसानों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछारें कीं। प्रदर्शनकारियों द्वारा अवरोधक तोड़कर 'अधिकारियों की अनुमति के बिना' लोक भवन की ओर मार्च करने का प्रयास किए जाने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की।
पुलिस ने बताया कि प्रशासन ने इससे पहले किसान संघों के केवल 32 प्रतिनिधियों को पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से मिलने तथा उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने की अनुमति दी थी।
हालांकि, प्रशासन ने किसानों की बड़ी संख्या वाले इस मार्च की अनुमति नहीं दी थी।
पुलिस ने बताया कि राज्यपाल ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने का इंतजार किया, लेकिन चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर किसान बड़ी संख्या में लोक भवन की ओर मार्च करने पर अड़े रहे, जिनमें से कुछ ने पुलिस के साथ झड़प भी की।
चंडीगढ़ की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कंवरदीप कौर ने पत्रकारों को बताया कि किसानों के पास इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं थी।
उन्होंने कहा, "हमने हाल ही में किसान संगठनों के साथ बैठक की थी, लेकिन उन्होंने हमें इस मार्च के बारे में सूचित नहीं किया था। वह केवल राज्यपाल को ज्ञापन ही सौंपने वाले थे। राज्यपाल ने उनके 32 प्रतिनिधियों को मुलाकात का समय दिया था और वे उनका इंतजार भी कर रहे थे।"
एसएसपी ने बताया कि जब किसान मार्च करते हुए अवरोधक पार करने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
उन्होंने कहा, "हमने उन्हें रोकने के लिए मामूली बल का प्रयोग किया।"
पुलिस ने बताया कि उन्होंने कुछ किसानों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। पुलिस ने दावा किया कि इस झड़प में चार से पांच जवान घायल हो गए हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले पूरे पंजाब से बड़ी संख्या में जुटे किसान मोहाली में एकत्र हुए और मोहाली-चंडीगढ़ सीमा से लोक भवन तक मार्च निकालने की कोशिश की।
किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने, नदी जल विवाद के समाधान और पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के कुछ प्रावधानों को निरस्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
किसान जब मोहाली-चंडीगढ़ सीमा के पास पहुंचे, तो कुछ प्रदर्शनकारी अवरोधक लांघकर दूसरी ओर जाने की कोशिश करने लगे जबकि एक युवा प्रदर्शनकारी ने ट्रैक्टर से अवरोधक को तोड़ने की कोशिश की।
जोगिंदर सिंह उगराहां समेत कुछ एसकेएम नेताओं ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में कुछ किसान घायल हुए हैं।
उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्ण ढंग से मार्च करना चाहते थे और पंजाब के राज्यपाल-सह-केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक को एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
पुलिस कार्रवाई के बाद मोहाली में किसानों की एक सभा को संबोधित करते हुए एसकेएम के वरिष्ठ नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने घोषणा की कि किसान शनिवार को पूरे पंजाब में पंजाब के राज्यपाल और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पुतले जलाएंगे। उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई तय करने के लिए 21 मई को विभिन्न किसान संगठनों के नेताओं की बैठक होगी।
एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी भी है, ''लेकिन आज हमें राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने से भी रोक दिया गया।''
किसानों ने मांग की कि नदी जल मुद्दे को नदी-तटीय बेसिन सिद्धांत के अनुसार हल किया जाना चाहिए क्योंकि पंजाब वह राज्य है जिससे होकर नदी बहती है और उसे पहला अधिकार होना चाहिए।
उन्होंने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 78, 79 और 80 को निरस्त करने की मांग की क्योंकि इन धाराओं के तहत पंजाब के जल पर नियंत्रण केंद्र सरकार के पास है।
प्रदर्शनकारियों ने बांध सुरक्षा अधिनियम और जल संशोधन अधिनियम 2024 को निरस्त करने की मांग की और दावा किया कि ये कानून राज्यों के जल अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
किसानों ने केंद्र सरकार से अमेरिका के साथ ''कृषि विरोधी मुक्त व्यापार समझौता'' करने के निर्णय को रद्द करने की भी अपील की।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के नियमों में संशोधन के जरिये पंजाब की स्थायी सदस्यता को समाप्त करने की कोशिश कर रही है।
भाषा प्रचेता प्रशांत
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