लद्दाख में स्थानीय समूहों ने उतारा उम्मीदवार, मुकाबला हुआ त्रिकोणीय
जोहेब नेत्रपाल
- 12 May 2024, 08:05 PM
- Updated: 08:05 PM
लेह, 12 मई (भाषा) लद्दाख लोकसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा माना जा रहा मुकाबला अब त्रिकोणीय हो गया है क्योंकि स्थानीय समूहों के गठबंधन ने राष्ट्रीय दलों को चुनौती देने के लिए एक निर्दलीय उम्मीदवार को मैदान में उतारा है।
क्षेत्रफल (173.266 वर्ग किलोमीटर) के मामले में देश की सबसे बड़ी सीट पर 20 मई को मतदान होगा। 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होने और केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिए जाने के बाद इस क्षेत्र में यह पहला बड़ा चुनावी मुकाबला है।
भाजपा ने मौजूदा सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल को हटाकर इस सीट से लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (लेह) के सदस्य और मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष ताशी ग्यालसन को मैदान में उतारा है, वहीं कांग्रेस ने सेरिंग नामग्याल को अपना उम्मीदवार बनाया है।
करगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केडीए) ने आश्चर्यचकित करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के करगिल जिला अध्यक्ष हाजी हनीफा जान को मैदान में उतारा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल हैं।
कांग्रेस ने सबसे अधिक छह बार लद्दाख सीट जीती है और नेकां के साथ एक समझौते के अनुसार, एलएएचडीसी में नेता प्रतिपक्ष सेरिंग नामग्याल को मैदान में उतारा है क्योंकि दोनों दल ‘इंडिया’ गठबंधन और लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) में साथ हैं।
एलएबी और केडीए पिछले चार वर्षों से राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची लागू करने समेत लद्दाखी लोगों की विभिन्न मांगों के समर्थन में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के मांगों से सहमत नहीं होने के बाद मार्च में इसमें रुकावट आ गईं।
हालांकि, अब केडीए द्वारा जान को मैदान में उतारे जाने से इस सीट पर कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। इस सीट पर 1.84 लाख से अधिक मतदाता हैं। मुस्लिम बहुल करगिल जिले में 95,926 और लेह जिले में 88,877 मतदाता हैं।
केंद्र सरकार द्वारा मांगें पूरी न किए जाने पर भाजपा के खिलाफ नाराजगी स्पष्ट है और लगातार तीसरी बार जीत की उम्मीद कर रही पार्टी ने स्थिति को संभालने के लिए केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू को भेजा है। वह शनिवार को केंद्र शासित प्रदेश पहुंचे।
थुपस्तान छेवांग ने 2014 में पहली बार भाजपा के लिए सीट जीती थी। हालांकि, उन्होंने 2018 में पार्टी की मूल सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और फिलहाल एलएबी का नेतृत्व कर रहे हैं।
साल 2019 में भाजपा के जामयांग त्सेरिंग नामग्याल ने इस सीट पर जीत हासिल की थी, जिन्हें इस बार पार्टी ने टिकट नहीं कर दिया।
भाषा जोहेब