ओडिशा : क्रॉस-वोटिंग के लिए 11 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग खारिज
पारुल
- 23 Jun 2026, 12:36 AM
- Updated: 12:36 AM
भुवनेश्वर, 22 जून (भाषा) ओडिशा विधानसभा के अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान 'क्रॉस वोटिंग' करने के आरोपी 11 विधायकों को अयोग्य घोषित करने का अनुरोध किया गया था।
दोनों विपक्षी दलों ने कहा कि वे इस मामले को उच्च न्यायालय में ले जाएंगे। उन्होंने पाढ़ी पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया।
बीजद विधायक और पूर्व मंत्री अरुण साहू ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "अयोग्यता याचिका को खारिज करके अध्यक्ष ने लोकतंत्र की हत्या की है और अपने पद की गरिमा को कम किया है। हम निश्चित रूप से उच्च न्यायालय जाएंगे।"
अपनी पार्टी के आठ विधायकों को अयोग्य ठहराने की अपील करते हुए याचिकाएं दायर करने वाली बीजद की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष का यह फैसला संविधान की दसवीं अनुसूची का पूरी तरह से उल्लंघन है।
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि वह विधानसभा अध्यक्ष के फैसले से हैरान नहीं हैं।
दास ने कहा, "चूंकि चिह्नित विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था, इसलिए यह स्पष्ट है कि अध्यक्ष हमारी याचिका खारिज कर देंगी। अब हमारे लिए उच्च न्यायालय के दरवाजे खुले हैं।"
ओडिशा के राजस्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश पुजारी ने कहा कि विपक्ष को दल-बदल विरोधी कानून और इसके इस्तेमाल के दायरों का अध्ययन करने की जरूरत है।
मलिक ने जहां अपनी पार्टी के आठ विधायकों को अयोग्य ठहराने की अपील की थी, कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम ने अपनी पार्टी के तीन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की याचिका दायर की थी।
बीजद की याचिकाओं का हवाला देते हुए विधानसभा सचिवालय ने 19 जून की अधिसूचना में कहा, ''ये याचिकाएं संक्षिप्त, अस्पष्ट, बिना ठोस आधार के और कानूनी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती हैं, इसलिए इन्हें गुण-दोष के आधार पर विचार के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता...।''
अधिसूचना में कहा गया, ''ये याचिकाएं गंभीर त्रुटियों से ग्रस्त हैं या इन्हें कानूनी प्रावधानों की स्पष्ट अनभिज्ञता के साथ पेश किया गया है, जिसके चलते ये विचार करने योग्य नहीं हैं।''
इसमें कहा गया कि जांच के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने पाया कि विधायकों के खिलाफ पेश साक्ष्य संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2(1)(ए) के तहत स्वेच्छा से त्यागपत्र देने या दल-बदल को प्रमाणित नहीं करते हैं।
अधिसूचना में कहा गया, "ये (याचिकाएं) ओडिशा विधानसभा सदस्य (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1987 के तहत अनिवार्य आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रही हैं।"
इसमें कहा गया कि याचिकाओं को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत निर्धारित तरीके से सत्यापित नहीं किया गया था।
विधानसभा अध्यक्ष पाढ़ी ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि इसके समर्थक अनुलग्नक, दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य उचित रूप से प्रमाणित नहीं थे और याचिका में लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए कोई शपथ पत्र दायर नहीं किया गया था।
पाढ़ी ने कहा कि नियमों के तहत अनिवार्य प्रक्रियात्मक आवश्यकताएं भी पूरी नहीं की गईं। उन्होंने कहा, ''यह निर्णय कानून के अनुसार लिया गया है।''
बीजद ने आठ विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी-इनमें बालिगुड़ा से विधायक चक्रमणि कन्हर, बांकी से देवी रंजन त्रिपाठी, पटकुरा से अरविंद महापात्रा, चंपुआ से सनातन महाकुड, बस्ता से सुभासिनी जेना, जयदेव से नब किशोर मलिक और कटक-चौद्वार से सौविक बिस्वाल शामिल हैं।
कांग्रेस ने जिन विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए याचिकां दायर की थीं, उनमें बाराबती-कटक से सोफिया फिरदौस, सनाखेमुंडी से रमेश जेना और मोहना से दशरथ गमांग शामिल हैं।
कथित क्रॉस-वोटिंग की घटना 16 मार्च को ओडिशा से राज्यसभा की चार सीट के चुनाव के दौरान हुई थी।
बीजद ने कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के साथ समझौते के तहत एक सीट के लिए प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होता को संयुक्त उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा था।
विपक्षी गठबंधन की 147 सदस्यीय विधानसभा में स्पष्ट संख्यात्मक बढ़त (उस समय बीजद के 50 विधायक, साथ ही कांग्रेस का समर्थन) होने के बावजूद डॉ. होता भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे से पराजित हो गए। यह हार कथित तौर पर विपक्षी दलों के 11 विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग के कारण हुई बताई जाती है।
भाषा सुमित पारुल
पारुल
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