दिल्ली के सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के अनुसार 'भेदभावपूर्ण नीति' के खिलाफ संघर्ष विफल हो गया है
नोमान माधव
- 11 Mar 2024, 09:42 PM
- Updated: 09:42 PM
नयी दिल्ली,11 मार्च (भाषा) दिल्ली में महीनों तक चले सीएए विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले लोगों ने कानून लागू करने के लिए सोमवार को जारी केंद्र की अधिसूचना का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि उनका संघर्ष विफल हो गया है।
केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सोमवार को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए)-2019 को लागू करने की घोषणा की। विवादास्पद कानून को पारित किये जाने के चार साल बाद केंद्र के इस कदम के कारण पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आने वाले गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करने का रास्ता साफ हो गया है।
सीएए के नियम जारी हो जाने के साथ ही अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार इन तीन देशों के प्रताड़ित गैर-मुस्लिम प्रवासियों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता देना शुरू कर देगी।
जामिया मिलिया इस्लामिया और शाहीन बाग 2019-2020 में सीएए विरोधी प्रदर्शन का केंद्र था। इस कानून को 11 दिसंबर 2019 को संसद ने पारित किया था, जिसके बाद दिल्ली सहित पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुलिस कुछ कथित उपद्रवियों का पीछा करने के लिए जामिया परिसर में घुस गई थी, जिन्होंने बसों में कथित रूप से आग लगाई थी। पुलिस कर्मियों पर 15 दिसंबर 2019 को विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में छात्रों पर हमला करने का आरोप है।
हिंसा में कई छात्र घायल हो गए थे। लगभग उसी समय, शाहीन बाग को नोएडा से जोड़ने वाले कालिंदी कुंज मार्ग पर लोग एकत्र हो गए थे।
लगभग चार साल बाद, उन विरोध प्रदर्शनों से जुड़े लोगों ने नियमों को अधिसूचित किए जाने पर असंतोष व्यक्त किया है।
शाहीन बाग में सीएए विरोधी प्रदर्शन में शामिल समायरा खान ने कहा, “ सीएए लागू होने के साथ, ऐसा लगता है कि 100 दिनों से अधिक समय तक भेदभावपूर्ण नीति के खिलाफ हमारा संघर्ष विफल हो गया है। इतने लोगों की जान चली गई और फिर भी सरकार ने इसे लागू करने का फैसला किया है।”
उन्होंने कहा, “ हम असहाय महसूस करते हैं और निराश हैं। यह एक राजनीतिक कदम है जिसका मकसद लोकसभा चुनाव में अधिक वोट हासिल करना है।”
फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की कथित साज़िश से जुड़े यूएपीए मामले में गिरफ्तार उमर खालिद की ‘पार्टनर’ बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने पीटीआई-भाषा से कहा, “ जब सीएए की घोषणा की गई, तो हम इसका विरोध किया था क्योंकि यह संविधान को कमजोर कर रहा था। हम अब भी इसका विरोध कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “ इस कानून को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई है। हम इसके खिलाफ कानूनी-राजनीतिक लड़ाई लड़ेंगे।”
जामिया मिलिया इस्लामिया प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए परिसर के अंदर और बाहर सुरक्षा बढ़ा दी है।
जामिया के कार्यवाहक कुलपति इकबाल हुसैन ने पीटीआई-भाषा से कहा, “ परिसर में किसी भी तरह के आंदोलन से बचने के लिए हमने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। परिसर के पास छात्रों या बाहरी लोगों को सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।”
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में 22 मार्च को होने वाले छात्र संघ चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता लागू है।
जेएनयू की कुलपति शांतिश्री डी पंडित ने पीटीआई-भाषा से कहा, “ हमारे विश्वविद्यालय में आगामी जेएनयूएसयू (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ) चुनावों के कारण वर्तमान में आचार संहिता लागू है। इसलिए परिसर में विरोध प्रदर्शन की कोई संभावना नहीं है क्योंकि छात्रों ने खुद ही आचार संहिता जारी की है।”
उन्होंने कहा, “ मुझे नहीं लगता है कि छात्र या संकाय सदस्य किसी आंदोलन में शामिल होंगे। चार साल बाद हो रहे चुनाव की तैयारी में हर कोई व्यस्त है।”
भाषा नोमान