भारत ने कभी जीएम उत्पादों के आयात की अनुमति नहीं दी, डेयरी क्षेत्र भी नहीं खोलेगा: गोयल
भाषा
- 03 Nov 2026, 03:31 PM
- Updated: 03:31 PM
नयी दिल्ली, तीन नवंबर (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत ने किसी भी मुक्त व्यापार समझौते में अपने डेयरी क्षेत्र को नहीं खोला है और आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) उत्पादों के आयात की अनुमति भी नहीं देगा।
उन्होंने इन दोनों मुद्दों को देश के लिए ''बहुत संवेदनशील'' बताया।
राष्ट्रीय राजधानी में किरोड़ीमल कॉलेज के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत ने किसी भी संवेदनशील वस्तु पर ''कभी भी'' समझौता नहीं किया है और व्यापार समझौतों में हमेशा अपने किसानों, मछुआरों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के हितों की रक्षा की है। ''
उन्होंने व्यापार समझौतों से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा, ''हम कुछ कृषि उत्पादों और कुछ ऐसी वस्तुओं के मामले में बाजार खोलने को लेकर बहुत संवेदनशील हैं जिनमें हमारी मजबूत स्थिति है, जैसे समुद्री उत्पाद। हम अपना डेयरी क्षेत्र खोलने को लेकर बहुत संवेदनशील हैं। वास्तव में, आज तक हमने किसी के लिए भी डेयरी क्षेत्र नहीं खोला है।
उन्होंने कहा, ''हम भारत में किसी भी जीएम उत्पाद को आने देने के मामले में बहुत संवेदनशील हैं। हमने कभी इसकी अनुमति नहीं दी है और भविष्य में भी ऐसा नहीं करेंगे। हम अपनी धार्मिक संवेदनशीलताओं को लेकर भी सतर्क हैं। अक्सर विदेशों में डेयरी उत्पाद बनाने के दौरान बछड़े के मांस या 'रेनेट' का इस्तेमाल किया जाता है...हम भारत में इसकी अनुमति नहीं देते। इसके लिए सख्त प्रमाणन जरूरी है, ताकि भारत के बड़े हिस्से की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।''
'रेनेट' पनीर बनाने में इस्तेमाल होने वाला एक एंजाइम है, जिसे परंपरागत रूप से छोटे बछड़ों के पेट की अंदरूनी परत से निकाला जाता है।
मंत्री ने कहा, ''हमारा प्रयास रोजगार के नए अवसरों के साथ-साथ अपने उन उत्पादों के लिए नए बाजार खोलना है, जिनमें हम प्रतिस्पर्धी हैं और जिनसे भारत के बड़े हिस्से, हमारे एमएसएमई, कृषि क्षेत्र के किसानों तथा सभी को बड़े पैमाने पर लाभ मिल सकता है।''
ये टिप्पणियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है और इनमें ज्यादातर छोटे तथा सीमांत किसान हैं।
नीति-निर्माताओं को आशंका है कि जीएम फसलों का सस्ता और बड़े पैमाने पर आयात, खासकर विकसित देशों की अत्यधिक मशीनीकृत और सब्सिडी वाली कृषि प्रणालियों से होने वाला आयात, घरेलू कीमतों को नीचे ला सकता है और ग्रामीण आय को नुकसान पहुंचा सकता है। ये उत्पाद खाद्य सुरक्षा, किसानों की आजीविका, पर्यावरण संबंधी जोखिमों, धार्मिक चिंताओं और व्यापार संरक्षण से जुड़े मुद्दों के कारण भी संवेदनशील हैं।
अमेरिका की जीएम कृषि उत्पादों और डेयरी उत्पादों में बड़ी कारोबारी रुचि है। भारत के नियम धार्मिक संवेदनशीलताओं के कारण पशु-आधारित चारा खाने वाले पशुओं से प्राप्त उत्पादों के आयात पर रोक लगाते हैं।
गोयल ने कहा कि भारत हमेशा कपड़ा, दवा, कृषि उत्पादों तथा रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों के लिए तरजीही बाजार पहुंच हासिल करने का प्रयास करता है।
उन्होंने कहा, ''ये सभी हमारे हित के क्षेत्र हैं, जिनके लिए हम तरजीही बाजार पहुंच हासिल करने का प्रयास करते हैं। भारत से आने वाले सामान पर लगाए जाने वाले शुल्क हमारी प्रतिस्पर्धी देशों- इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम, चीन और फिलिपीन...की तुलना में कम हों।''
उन्होंने कहा, ''हमारा प्रयास है कि भारत को अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले तरजीही दर मिले।''
रोजगार के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार देश में विनिर्माण को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है।
गोयल ने कहा, ''हम विनिर्माण और अधिक सरकारी नौकरियों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं। नियमित रोजगार तलाशने वालों के लिए अधिक अवसर पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन आज दुनिया उद्यमिता और स्टार्टअप के लिए भी रास्ते खोल रही है और नए अवसर दे रही है। मैं आपसे आग्रह करूंगा कि आप इन पर गंभीरता से विचार करें।''
देश के निर्यात के बारे में विद्यार्थियों को बताते हुए मंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 में एक लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्यात करना है।
अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान भारत का निर्यात करीब 480 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया है, जो सालाना आधार पर करीब 14 प्रतिशत अधिक है।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य हासिल करने के लिए शेष छह महीनों में ''हमें 520 अरब अमेरिकी डॉलर'' का निर्यात करना होगा और अक्टूबर में ''हमारे निर्यात के आंकड़े बहुत अच्छे'' रहे हैं।
अक्टूबर के व्यापार आंकड़े नवंबर के मध्य में आधिकारिक रूप से जारी किए जाएंगे।
चीन की ओर से 'टनल बोरिंग' मशीनों के निर्यात पर नियंत्रण लगाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यदि इन मशीनों की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो भारत इन्हें खुद बनाने की दिशा में काम करेगा।
उन्होंने कहा कि दुर्लभ खनिज तत्वों तक पहुंच रोके जाने पर भी देश ने किसी के सामने मदद के लिए हाथ नहीं फैलाया था।
गोयल ने कहा कि भारत देश में विमानों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए विमान विनिर्माता कंपनियों एम्ब्रेयर, एयरबस और बोइंग के साथ काम कर रहा है। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
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