अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो मुंबई पहुंचे; व्यापार समझौते और ऊर्जा पर रहेगी नजर
भाषा
- 20 Oct 2026, 05:35 PM
- Updated: 05:35 PM
नयी दिल्ली/मुंबई, 20 अक्टूबर (भाषा) अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को भारत की अपनी तीन दिवसीय यात्रा की शुरुआत की। इस यात्रा का उद्देश्य ऊर्जा, व्यापार और निवेश, रक्षा तथा महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना और पश्चिम एशिया संकट पर विचारों का आदान-प्रदान करना है।
इस साल रुबियो की यह दूसरी भारत यात्रा है। मई में अपनी पिछली यात्रा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत की थी तथा 'क्वाड' (चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया था।
अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया है और उनकी इस यात्रा में मुख्य रूप से भारत एवं अमेरिका के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने पर जोर दिए जाने की संभावना है।
जयशंकर और रुबियो के मंगलवार दोपहर मुंबई में होने वाली बैठक में 'भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा करने की उम्मीद है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मुंबई में रुबियो के पहुंचने के कुछ ही देर बाद सोशल मीडिया पर लिखा, ''भारत की अपनी दूसरी यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री का मुंबई में स्वागत है।''
भारत की आर्थिक राजधानी के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अमेरिकी राजनयिक के उतरने के कुछ ही समय बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर यह पोस्ट किया।
हवाई अड्डे पर महाराष्ट्र के संस्कृति, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और एआई मंत्री आशीष शेलार ने रुबियो का स्वागत किया।
जायसवाल ने कहा, ''यह यात्रा 'भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' के विभिन्न स्तंभों के बीच सहयोग को और आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करती है।''
रुबियो विदेश मंत्री जयशंकर के साथ बैठक करेंगे। इसके अलावा उनका मुंबई में 26/11 आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए ताज स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित करने का भी कार्यक्रम है। इस हमले में 160 से अधिक लोगों की जान गई थी जिनमें छह अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे।
अमेरिका के शीर्ष राजनयिक अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक स्वागत समारोह में भी शामिल होंगे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले सप्ताह कहा था, ''चर्चा में ऊर्जा, व्यापार और निवेश, रक्षा, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों और आपसी हित के अन्य क्षेत्रों सहित द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख पहलुओं को शामिल किए जाने की उम्मीद है।''
दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते और पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा होने की संभावना है।
जायसवाल ने कहा, ''यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बनाए रखने और साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी।''
रुबियो बुधवार को गुजरात के जामनगर जाएंगे।
अपनी इस यात्रा से पहले रुबियो ने उज्बेकिस्तान में कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के ''बेहद करीब'' है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका द्वारा शुल्क में छूट देने का फैसला इसी से जुड़ा है।
पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और रूसी तेल के पांच सबसे बड़े खरीदारों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को निलंबित कर दिया था।
रुबियो ने कहा, ''हम अभी भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। हम ऐसा करने के बहुत करीब हैं। इसलिए जब राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी छूट या इस तरह के अन्य मामलों पर कोई फैसला लेते हैं तो हम इन बातों को भी ध्यान में रखते हैं।''
भारत और अमेरिका 2025 की शुरुआत से ही एक प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इसका उद्देश्य शुल्क संबंधी विवादों को सुलझाना, गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाना और दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुंच को बढ़ाना है।
भारत चाहता है कि अमेरिकी बाजार में उसके सामान पर उसके प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर शुल्क दरें लागू हों।
जयशंकर ने कुछ दिन पहले कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता अब समझौते के अंतिम चरण के करीब पहुंच रही है।
पिछले साल अमेरिका द्वारा भारत पर दंडात्मक शुल्क लगाए जाने और ट्रंप द्वारा मई 2025 में भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव को कम करने में अपनी भूमिका के दावे किए जाने के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में काफी गिरावट आई थी। ट्रंप के इन दावों पर भारतीय अधिकारियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
अमेरिका की नयी आव्रजन नीति और एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ाने के फैसले ने भी भारत-अमेरिका संबंधों में गिरावट में योगदान दिया।
इसके अलावा, जब अमेरिका ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और विप्रो जैसी प्रमुख वैश्विक और भारतीय आईटी कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रीन-कार्ड प्रोसेसिंग प्रोग्राम को सीमित करने का फैसला किया तो दोनों देशों के संबंधों में और अधिक तनाव आ गया।
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