मुंबई उच्च न्यायालय ने राहुल गांधी को 2019 में जारी समन रद्द करने से इनकार किया
/IANS
- 08 Sep 2026, 02:40 PM
- Updated: 02:40 PM
मुंबई, आठ सितंबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को 2019 में जारी किए गए समन को रद्द करने से इनकार कर दिया। यह समन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ उनकी उस टिप्पणी को लेकर दायर मानहानि की शिकायत के मामले में जारी किया गया था, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री को ''कमांडर-इन-थीफ'' कहा था।
न्यायमूर्ति एन. आर. बोरकर की एकल पीठ ने मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश के खिलाफ गांधी की याचिका खारिज कर दी।
बहरहाल, उच्च न्यायालय ने 2021 के अपने उस आदेश को जारी रखा, जिसमें मजिस्ट्रेट को शिकायत पर सुनवाई छह सप्ताह के लिए टालने का निर्देश दिया गया था, ताकि गांधी इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकें।
मानहानि की शिकायत पर सुनवाई टालने के निर्देश का मतलब था कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने की जरूरत नहीं होगी।
शिकायतकर्ता एम. एच. श्रीश्रीमल ने उच्च न्यायालय में गांधी की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सदस्य होने के नाते वह अपने नेता के खिलाफ की गई टिप्पणियों से आहत हैं।
अदालत ने गांधी की इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि शिकायतकर्ता पीड़ित पक्ष नहीं हैं, क्योंकि टिप्पणियां राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के खिलाफ की गई थीं।
न्यायमूर्ति बोरकर ने कहा कि भाजपा ''सदस्यों के एक वर्ग वाली निर्धारित संस्था'' है और शिकायतकर्ता श्रीश्रीमल 2018 से पार्टी के सक्रिय सदस्य हैं।
उच्च न्यायालय ने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भाजपा का एक प्रमुख चेहरा हैं और इसलिए उनके खिलाफ की गई किसी भी टिप्पणी का भाजपा के सदस्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता।''
अदालत ने कहा कि गांधी द्वारा की गई टिप्पणियां व्यक्तिगत प्रकृति की थीं या केवल प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाकर की गई थीं या नहीं, यह सबूतों और गवाहों के बयानों की जांच के बाद मुकदमे के दौरान ही निर्धारित किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति बोरकर ने कहा कि अदालत को मजिस्ट्रेट के आदेश में कोई ''त्रुटि और अवैधता'' नजर नहीं आई और इसलिए उसमें हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है।
उच्च न्यायालय ने कहा, ''इस अदालत को आदेश में कोई खामी नहीं मिली। इसलिए याचिका खारिज की जाती है।''
अदालत द्वारा आदेश पारित किए जाने के बाद गांधी के वकील सुदीप पसबोला ने अदालत से 2021 में जारी अंतरिम आदेश को आठ सप्ताह तक बढ़ाने का अनुरोध किया, ताकि कांग्रेस नेता इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकें।
हालांकि, श्रीश्रीमल के वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इस मामले में 2021 से ही सुनवाई पूरी तरह रुकी हुई है।
न्यायमूर्ति बोरकर ने अंतरिम आदेश की अवधि छह सप्ताह के लिए बढ़ा दी।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गिरगांव मजिस्ट्रेट के 28 अगस्त, 2019 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ दायर एक शिकायत पर आपराधिक प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया गया था। यह शिकायत एम. एच. श्रीश्रीमल ने दायर की थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने 20 सितंबर 2018 को राजस्थान में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को लेकर यह टिप्पणी कर उन्हें बदनाम किया था।
श्रीश्रीमल ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ रैली के दौरान की गई टिप्पणी के अलावा गांधी ने 24 सितंबर 2018 को अपने निजी 'एक्स' खाते पर एक वीडियो भी पोस्ट किया था, जिसमें राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री को ''कमांडर-इन-थीफ'' कहा गया था।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, इन बयानों में भाजपा के सभी सदस्यों और प्रधानमंत्री मोदी से जुड़े भारतीय नागरिकों पर सीधे तौर पर चोरी के आरोप लगाए गए थे।
गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता सुदीप पसबोला और अधिवक्ता कुशल मोर ने दलील दी कि शिकायत निराधार है तथा शिकायतकर्ता को इसे दायर करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।
उन्होंने कहा था कि शिकायतकर्ता इस मामले में पीड़ित पक्ष नहीं है और इसलिए वह ऐसी शिकायत दायर नहीं कर सकता।
भाषा