भाजपा ने नागेंद्र के इस्तीफ़े को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा
दिलीप
- 29 Aug 2026, 04:08 PM
- Updated: 04:08 PM
बेंगलुरु, 29 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता आर. अशोक ने शनिवार को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि वह बी. नागेंद्र (जिन्होंने इस्तीफा दे दिया है) का बचाव करने के लिए 'दलित पहचान' के मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री ने तभी इस्तीफा दिया, जब विपक्ष ने कथित वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाले में दस्तावेजी सबूत पेश किए।
नागेंद्र ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया था। विपक्ष लगातार मांग कर रहा था कि उन्हें राज्य कैबिनेट से हटाया जाए, क्योंकि उन पर 89 करोड़ रुपये के महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले का आरोप था।
कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अशोक ने कहा कि सरकार पी. चंद्रशेखरन को न्याय दिलाने में नाकाम रही है। चंद्रशेखरन निगम में लेखा अधीक्षक के पद पर थे और जून 2024 में उनकी मौत के बाद ही कथित अनियमितताएं सामने आई थीं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद नागेंद्र को पीड़ित के तौर पर क्यों दिखाया जा रहा है। खासकर विपक्षी भाजपा-जनता दल (सेक्युलर) के बढ़ते दबाव के कारण नागेंद्र ने इस्तीफा दिया, लेकिन उन्होंने उन पर एक 'दलित' का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी पार्टी को शर्मिंदा नहीं करना चाहते और न ही 'मनुवादियों' को हावी होने देना चाहते हैं।
नागेंद्र अनुसूचित जनजाति से हैं, लेकिन कर्नाटक में 'दलित' शब्द का इस्तेमाल व्यापक अर्थ में (खासकर राजनेताओं द्वारा) किया जाता है, जिसमें दबे-कुचले समुदायों को शामिल किया जाता है।
अशोक ने आरोप लगाया, ''पी. चंद्रशेखरन भी एक दलित थे, जिन्होंने घोटाले का खुलासा करने के बाद आत्महत्या कर ली। आप उन्हें न्याय नहीं प्रदान कर रहे हैं। उनके परिवार को कोई न्याय नहीं मिला है। उनके बच्चे बेसहारा हो गए हैं।''
उन्होंने दावा किया कि चंद्रशेखरन की मौत से ही फंड के दुरुपयोग का मामला सामने आया और कहा कि अगर ऐसा न होता तो भुगतान के समायोजन के जरिए इस मामले को दबा दिया जाता।
उन्होंने मृत अधिकारी के परिवार को पेंशन और ग्रेच्युटी न देने, और उनके बेटे को वादा की गई सरकारी नौकरी दिलाने में सरकार के नाकाम रहने को लेकर सवाल उठाए।
अशोक ने कहा कि उन्होंने विधानसभा और मीडिया के सामने 37 दस्तावेज जारी किए हैं। इनमें कथित तौर पर किए गए तबादले, मृत व्यक्ति का आधिकारिक नोट, बैंक से किए गए संवाद और फोन पर हुई बातचीत से जुड़ी फॉरेंसिक जांच का चार्ट शामिल है।
उन्होंने सवाल उठाया कि प्रभारी मंत्री के शामिल हुए बिना या बगैर उनकी जानकारी के लगभग 600 खातों में पैसे कैसे अंतरित किए जा सकते थे। साथ ही उन्होंने कथित 'सुसाइड नोट' का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें मंत्री के ज़ुबानी निर्देशों के आधार पर तबादला किए जाने की बात कही गई है।
अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि 4 मार्च से 23 मार्च के बीच बैंकों को भेजे गए सरकारी पत्रों से एक ऐसी व्यवस्था का पता चलता है, जिसके तहत बैंकों में जमा पैसे का इस्तेमाल कथित तौर पर उतनी ही रकम का कर्ज लेने के लिए किया गया था।
कांग्रेस के इस तर्क को खारिज करते हुए कि नागेंद्र को 'दलित' होने के कारण निशाना बनाया जा रहा है, अशोक ने कहा कि गलत काम के आरोपों से बचने के लिए जातिगत पहचान को ढाल के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
भाषा संतोष दिलीप
दिलीप
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