सतीशन ने 'नए युग के केरल' के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया
रंजन
- 15 Aug 2026, 11:05 AM
- Updated: 11:05 AM
तिरुवनंतपुरम, 15 अगस्त (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने लोगों से 'नए युग के केरल' के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए शनिवार को कहा कि राज्य को करुणा, सहिष्णुता, संवैधानिक मूल्यों और प्रगतिशील विकास के साथ आगे बढ़ना होगा।
सतीशन ने यहां सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रध्वज फहराया।
केंद्र सरकार के निर्देश के बावजूद समारोह में 'वंदे मातरम्' नहीं बजाया गया। राष्ट्रध्वज फहराए जाने के दौरान भारतीय वायुसेना के एक हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई।
सतीशन ने विभिन्न टुकड़ियों का निरीक्षण किया और पुलिस, राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी), राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), भारत स्काउट्स एवं गाइड्स और स्टूडेंट पुलिस कैडेट की मार्च करती टुकड़ियों की सलामी ली।
उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत राज्य में हाल में भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों को याद करते हुए की।
उन्होंने कहा, ''सरकार प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। हम हमेशा की तरह एकजुट होकर हर संकट से उबरेंगे। सरकार बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के लिए एक वैज्ञानिक प्रणाली तैयार कर रही है। हम सभी के सहयोग से इसे लागू करेंगे।''
देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और भारत के भविष्य को लेकर उनके दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए सतीशन ने कहा कि केरल के लोगों को भी एक नए युग के लिए संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''इस स्वतंत्रता दिवस पर हमें भी नए युग के केरल के लिए संकल्प लेना चाहिए। हमें ऐसा केरल बनाना है जिसमें करुणा, सेवा की भावना और सहिष्णुता हो। नयी पीढ़ी और वरिष्ठ नागरिकों को साथ लेकर चलने की भावना, धर्मनिरपेक्षता को कायम रखते हुए प्रगतिशील विकास की पहल, संवैधानिक मूल्य और कड़ी मेहनत हमारी आगे की यात्रा का आधार बने।''
सतीशन ने कहा कि देश, दुनिया और केरल बेहद महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''यह समस्याओं का बेहद बारीकी से विश्लेषण करने, भविष्य की ओर देखने और नयी पीढ़ी को साथ लेकर सावधानी से आगे बढ़ने का समय है।''
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र निरंतर संवाद की प्रक्रिया है और विपक्ष, सवाल उठाने, खुले संवाद एवं सुधार से लोकतंत्र को नयी ऊर्जा मिलती है।
सतीशन ने कहा, ''लोकतंत्र का मतलब किसी एक ही तरह के इंसान को तैयार करना, एक भाषा, एक आस्था एवं एक जीवनशैली को बढ़ावा देना नहीं है और न ही इसका अर्थ नफरत के ऐसे द्वीप और सांप्रदायिकता के ऐसे अंधेरे कोने बनाना है, जो हर भिन्नता को स्वीकार करने से इनकार करें।''
समारोह के दौरान सतीशन ने विभिन्न पुलिस पुरस्कार और वीरता पुरस्कार भी प्रदान किए।
भाषा सिम्मी रंजन
रंजन
1508 1105 तिरुवनंतपुरम