मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री की कथित ऑडियो क्लिप की फॉरेंसिक रिपोर्ट साझा करने का न्यायालय का निर्देश
सुरेश
- 07 Aug 2026, 09:19 PM
- Updated: 09:19 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को निर्देश दिया कि राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) की ओर से तैयार की गई नवीनतम फॉरेंसिक रिपोर्ट को कुकी समुदाय के एक संगठन के साथ साझा किया जाए। संगठन उन ऑडियो क्लिप की जांच की मांग कर रहा है, जिनमें कथित तौर पर मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की भूमिका का उल्लेख होने का दावा किया गया है।
न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने निर्देश दिया कि रिपोर्ट गोपनीय रखी जाए और उसे सार्वजनिक न किया जाए।
इस मामले में पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने एनएफएसयू की ताजा रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में रिकॉर्ड पर रखी।
उन्होंने पीठ को बताया कि एनएफएसयू ने यह निष्कर्ष निकाला है कि मामले का खुलासा करने वाले की रिकॉर्डिंग की पहली तैयार प्रति में भी बदलाव किया गया था और इसलिए, कोई विश्वसनीय फॉरेंसिक सत्यापन नहीं किया जा सका।
वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि फॉरेंसिक प्रयोगशाला 'ट्रुथ लैब्स' की रिपोर्ट में 93 प्रतिशत से ज्यादा यकीन के साथ यह नतीजा निकाला गया कि रिकॉर्डिंग में मौजूद आवाज बीरेन सिंह की ही थी।
न्यायमूर्ति कुमार ने निर्देश दिया कि एनएफएसयू रिपोर्ट की रंगीन प्रतियां संबंधित पक्षों को सीलबंद लिफाफे में उपलब्ध कराई जाएं, साथ ही इस बात पर जोर दिया कि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए।
उच्चतम न्यायालय ने 30 अप्रैल को गुजरात में एनएफएसयू से उस ऑडियो क्लिप की जांच कराने का निर्देश दिया, जिसमें सिंह का कथित तौर पर जातीय हिंसा से संबंध बताया गया है।
याचिकाकर्ता गैर-सरकारी संगठन 'कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट' की ओर से पेश हुए भूषण की इस दलील के बाद यह निर्देश जारी किया गया कि वे पूरी ऑडियो क्लिप रिकॉर्ड पर रख रहे हैं, जो दो घंटे से ज्यादा लंबी थी।
न्यायालय ने एनएफएसयू को निर्देश दिया था कि वह रिकॉर्डिंग का विश्लेषण करे और उसमें मौजूद आवाज के नमूने की तुलना सिंह की प्रमाणित आवाज के नमूनों से करे।
उच्चतम न्यायालय ने सात जनवरी को 48 मिनट की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच का आदेश दिया। एनजीओ का आरोप था कि यह रिकॉर्डिंग मणिपुर में 2023 में हुई जातीय हिंसा में सिंह की भूमिका की ओर इशारा करती है।
प्रदेश भाजपा के भीतर चल रही हलचल और नेतृत्व में बदलाव की बढ़ती मांगों के बीच, सिंह ने पिछले साल नौ फरवरी को मणिपुर के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
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