पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किये के बीच रक्षा समझौता; एक देश पर हमले को तीनों पर हमला माना जाएगा
पवनेश
- 07 Aug 2026, 07:39 PM
- Updated: 07:39 PM
इस्लामाबाद, सात अगस्त (भाषा) पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने शुक्रवार को एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत इनमें से किसी एक भी देश पर किये गए हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
एक संयुक्त बयान के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी युवराज (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई एक बैठक के दौरान 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए।
संयुक्त रक्षा के लिए मक्का अल-मुकर्रमा शिखर सम्मेलन के दौरान हुए इस समझौते का मकसद ''किसी भी तरह के हमले के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना है।''
बयान के अनुसार, ''इसमें यह भी तय किया गया कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी हुआ कोई भी सशस्त्र हमला, उन सभी पर हमला माना जाएगा।''
बयान में कहा गया है कि इसमें ''तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं को बेहतर बनाने'' की बात भी शामिल है।
बयान में कहा गया है कि यह समझौता ''एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की दिशा में अपनी सामूहिक सुरक्षा को और मजबूत करने तथा क्षेत्र और उसके बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए तीनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।''
यह समझौता पाकिस्तान (जो परमाणु हथियारों से लैस एकमात्र मुस्लिम देश है), सऊदी अरब (जो इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों का केंद्र और दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातकों में से एक है) और तुर्की (जो नाटो का सदस्य है) को एक साथ जोड़ता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष कई मोर्चों पर फैल गया है, जिसमें लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी शामिल हैं, जिसके कारण खाड़ी देशों को क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग मजबूत करना पड़ा है। शहबाज शरीफ ने अप्रैल में सऊदी अरब का दौरा किया था, जिस दौरान उन्होंने वहां के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत की थी।
पिछले हफ्ते, ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी जहाजों पर किये गए हमले के बाद, सऊदी अरब ने लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक पोत परिवहन मार्ग और जरूरी ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा के लिए एक बहुराष्ट्रीय समुद्री रक्षा गठबंधन (एमएमडीसी) बनाने का प्रस्ताव किया।
खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान समेत 14 देशों ने इस पहल का समर्थन किया है और दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं पर जोर दिया है।
साथ ही, पाकिस्तान ने पिछले हफ्ते कहा कि वह 18 जून को हुए इस्लामाबाद समझौते के तहत अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर वापस लाने के लिए ''पूरी कोशिश'' कर रहा है।
हाल के महीनों में तुर्किये और इजराइल के बीच तनाव बढ़ा है।
पिछले साल सितंबर में, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने ''सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौते'' पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें यह संकल्प लिया गया था कि उन दोनों में से किसी भी देश पर हमले को ''दोनों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई'' माना जाएगा।
रक्षा समझौते के तहत, पाकिस्तान ने संयुक्त प्रशिक्षण, रक्षा सहयोग और सऊदी अरब की सुरक्षा जरूरतों में मदद के लिए सैन्य कर्मियों और विमानों को तैनात किया।
संयुक्त बयान में कहा गया है कि मक्का समझौता तीनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों से प्रेरित है। यह भाईचारे और इस्लामी एकजुटता के मजबूत संबंध पर आधारित है जो उन्हें आपस में जोड़ते हैं, और साथ ही यह उनके साझा रणनीतिक हितों और लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग पर भी आधारित है।
शुक्रवार को हुई बैठक के दौरान, तीनों पक्षों ने अपने संबंधों की समीक्षा की और पारस्परिक हित के कई मुद्दों पर चर्चा की।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि बैठक से पहले, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और रक्षा बलों के प्रमुख, 'फील्ड मार्शल' आसिम मुनीर -- जो बृहस्पतिवार को तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर यहां पहुंचे थे -- ने सऊदी युवराज से मुलाकात की।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि शरीफ के साथ उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी थे।
पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल आठ अगस्त तक सऊदी अरब के तीन दिवसीय दौरे पर है।
भाषा सुभाष पवनेश
पवनेश
0708 1939 इस्लामाबाद