विहिप और संत समाज ने संसद परिसर में भगवा वेश में विपक्ष के प्रदर्शन की निंदा की
नरेश
- 31 Jul 2026, 07:48 PM
- Updated: 07:48 PM
नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने अयोध्या में राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी को उजागर करने के लिए संसद परिसर में भगवा कपड़े पहनकर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और विपक्ष के अन्य सांसदों द्वारा किए गए एक 'नाटक' की शुक्रवार को निंदा की एवं कहा कि इस प्रदर्शन से हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं का अपमान हुआ है।
राममंदिर और अयोध्या की धार्मिक संस्थाओं से संबद्ध कई प्रमुख संतों एवं पदाधिकारियों ने भी इस विरोध-प्रदर्शन की आलोचना की तथा इसमें शामिल सांसदों के निष्कासन की मांग की।
उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से प्रदर्शन में शामिल सांसदों की सदस्यता रद्द करने की अपील की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के पूर्व प्रमुख राहुल गांधी चढ़ावा चोरी के विरोध में हुए प्रदर्शन में शामिल थे।
संसद के मकर द्वार के सामने विरोध प्रदर्शन करते हुए सांसदों ने 'चढ़ावा चोर, गद्दी छोड़' के नारे लगाए। सांसदों ने मकर द्वार की सीढ़ियों के सामने दान-पात्र रखे और निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उन बक्सों के पास बैठ गए। राजेश रंजन पप्पू यादव के नाम से भी जाने जाते हैं।
एक नाटक के तौर पर, राहुल गांधी समेत सांसदों ने बक्सों में पैसे डाले, जबकि गेरुआ कपड़े पहने यादव ने राम मंदिर में कथित चोरी को दिखाने के लिए पैसे अपनी जेब में डाल लिए।
एक वीडियो बयान में, विहिप के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त सचिव सुरेंद्र जैन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थित यादव तथा गांधी और कांग्रेस के अन्य सांसदों एवं समाजवादी पार्टी के अन्य सांसदों ने हिंदू संतों के कपड़े पहनकर 'अभ्रद' विरोध प्रदर्शन किया।
जैन ने कहा, ''विहिप उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर भी विचार कर रही है। हम लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध करते हैं कि वह उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करें ताकि कोई भी इस तरह हिंदू आस्था का अपमान करने की हिम्मत न करे।''
उन्होंने आरोप लगाया, ''संत का वेश धारण करके उन्होंने न केवल संतों का अपमान किया है, बल्कि हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई है। देश की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी।"
रामायण से तुलना करते हुए जैन ने कहा, "जिस प्रकार रावण ने सीता का अपहरण करने के लिए संत का वेश धारण किया था, क्या अब वे संत का वेश धारण करके हिंदू धर्म पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं? ऐसा कभी संभव नहीं होगा।"
उन्होंने विपक्षी नेताओं को 'मौलवी या पादरी का भेष धारण कर इन धर्मों का मजाक उड़ाने की चुनौती दी।' उन्होंने आरोप लगाया कि वे केवल हिंदू मान्यताओं को निशाना बना सकते हैं।
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्रानंद सरस्वती ने एक वीडियो बयान में कहा,''कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, अन्य कांग्रेस सांसदों और पप्पू यादव द्वारा भगवा वस्त्र पहनकर सनातन धर्म का अपमान करने के लिए संसद परिसर का गलत इस्तेमाल करना अस्वीकार्य है।''
उन्होंने कहा, ''राम मंदिर के मुद्दे पर अयोध्या के संतों ने पहले ही अपनी प्रतिक्रिया दे दी है। कथित चोरी के मामले को एसआईटी और उच्चतम न्यायालय देखेगा। लेकिन इसे बहाना बनाकर सनातन धर्म और संतों के त्याग एवं तपस्या को बदनाम करने की कोशिश को अखिल भारतीय संत समिति बर्दाश्त नहीं करेगी।''
उन्होंने कहा, ''अगर आप भाजपा से राजनीतिक तौर पर लड़ना चाहते हैं, तो लड़ें। लेकिन भगवान राम को अपशब्द कहना, सनातन धर्म का अपमान करना और गेरुआ वस्त्र पहनकर साधु-संतों का अनादर करना स्वीकार्य नहीं है। हम इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। उन्हें देश के हिंदुओं से बिना शर्त माफ़ी मांगनी चाहिए।''
इस घटना को 'बेहद निंदनीय' बताते हुए आचार्य विक्रमादित्य ने कहा, ''विपक्ष ने मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित चोरी में संतों को शामिल दिखाने की कोशिश की, जबकि जांच में सिर्फ कुछ कर्मचारी ही शामिल पाए गए और उन्हें जेल भेज दिया गया है। यह पूरी तरह से मज़ाक जैसा था और उनके ख़िलाफ सख़्त कार्रवाई की जानी चाहिए।''
सरयू आरती समिति के अध्यक्ष महामंडलेश्वर शशिकांत दास ने यादव की हरकत की निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने साधु-संतों जैसे कपड़े पहने थे और विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके साथ बुरा बर्ताव किया गया।
भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने आरोप लगाया कि यह कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और पूरे विपक्ष द्वारा रची गई एक 'साजिश' थी।
उन्होंने कहा, '' हम उनके कृत्यों की कड़ी निंदा करते हैं। हम लोकसभा अध्यक्ष से भी आग्रह करते हैं कि वे सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।''
महामंडलेश्वर नारायण गिरि जी महाराज ने कहा, ''जो लोग देश में ऐसे मुद्दे उठाते हैं, उनका सनातन धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।''
राम मंदिर और अयोध्या के धार्मिक संस्थानों से जुड़े कई अन्य संतों और पदाधिकारियों ने भी संसद परिसर में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन की निंदा की।
भाषा राजकुमार नरेश
नरेश
3107 1948 दिल्ली