पानी उतर रहा है, लेकिन बाढ़ से प्रभावित लोग घर लौटने में असमर्थ, क्योंकि घर क्षतिग्रस्त हो गए: हिमंत
सुरेश
- 29 Jul 2026, 10:37 PM
- Updated: 10:37 PM
गुवाहाटी, 29 जुलाई (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बुधवार को कहा कि बाढ़ प्रभावित ज्यादातर इलाकों से पानी उतर गया है, लेकिन प्रभावित लोग वापस नहीं लौट पा रहे हैं, क्योंकि उनके घर या तो क्षतिग्रस्त हो गए हैं या उनमें कीचड़ और गाद भर गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे ज्यादा प्रभावित कुछ इलाकों तक पहुंचना अब भी मुश्किल हो रहा है, क्योंकि नगालैंड की पहाड़ियों से पानी के साथ बहकर आए कीचड़ से सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं।
राज्य के भाजपा कार्यकर्ताओं से इकट्ठा की गई राहत सामग्री को रवाना करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए शर्मा ने कहा, ''बाढ़ की स्थिति में सुधार हुआ है, क्योंकि 21 जुलाई के बाद से भारी बारिश नहीं हुई है। लेकिन समस्या यह है कि नुकसान बहुत ज्यादा हुआ है।''
उन्होंने कहा, ''लोग अपने घरों को नहीं लौट पा रहे हैं, क्योंकि उनके घर या तो क्षतिग्रस्त हो गए हैं या उनमें कीचड़ और गाद भर गई है।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुल मिलाकर बाढ़ का पानी उतर रहा है और आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार होगा।
इस सवाल पर कि क्या असम वैश्विक समुदाय से मदद मांगेगा, मुख्यमंत्री ने कहा, ''हमें अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारें स्थिति से निपटने में सक्षम हैं।''
इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि असम में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए आई अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने बुधवार को अपना चार दिन का दौरा पूरा किया।
मुख्य सचिव रवि कोटा ने यहां एक बैठक में केंद्रीय टीम को हालात की जानकारी दी। इस टीम का नेतृत्व गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव रामचंद्रुडु कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने ऊपरी असम के बाढ़ प्रभावित जिलों के दौरे के दौरान बाढ़ की स्थिति और जारी राहत, बचाव और बहाली के प्रयासों की समीक्षा की।''
पोस्ट में कहा गया, ''मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के निर्देश पर, असम के मुख्य सचिव ने केंद्रीय टीम को बाढ़ के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जिसने शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों को बुरी तरह प्रभावित किया है।''
इस साल असम में बाढ़ से कम से कम 75 लोगों की मौत हुई है और 3.32 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।
भाषा शफीक सुरेश
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