ई-रिक्शा को दूर से बंद करने में मोबाइल ऐप के गलत इस्तेमाल का संज्ञान लिया गया: सरकार
अविनाश
- 29 Jul 2026, 09:19 PM
- Updated: 09:19 PM
नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) सरकार ने बुधवार को संसद में कहा कि ई-रिक्शा की बैटरी को दूर से नियंत्रित करने के लिए कुछ 'बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम' मोबाइल ऐप के गलत इस्तेमाल से जुड़ी खबरों का उसने संज्ञान लिया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, ''3 जुलाई 2026 को सरकार ने ऐप स्टोर से ऐसे ऐप को हटाने का आदेश जारी किया।''
उनसे सवाल पूछा गया था कि क्या सरकार ने 'बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम' से जुड़े मोबाइल ऐप के दुरुपयोग के उन मामलों का संज्ञान लिया है, जिनके जरिए ई-रिक्शा और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों को दूर से बंद कर दिया जाता था तथा उन्हें दोबारा चालू करने के नाम पर खासकर आर्थिक रूप से कमजोर ई-रिक्शा चालकों से पैसे वसूले जाते थे।
मंत्री ने एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना ने घरेलू मोबाइल उत्पादन के क्षेत्र में 96,000 करोड़ रुपये के निवेश को प्रोत्साहित किया है।
प्रसाद ने कहा कि सरकार की पहल के बाद, देश में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 में 11.32 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिसमें सालाना 15.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
मंत्री ने कहा, ''स्मार्टफोन, जो 2014 में सबसे अधिक निर्यात होने वाली 100 वस्तुओं में शामिल नहीं थे, अब पेट्रोलियम, रत्न और आभूषणों को पीछे छोड़कर वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से सर्वाधिक निर्यात होने वाली वस्तु हो गई है।''
उन्होंने कहा कि 'सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम' के तहत 12 परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।
प्रसाद ने कहा, ''इनमें से 3 परियोजनाओं में वाणिज्यिक उत्पादन पहले ही शुरू हो चुका है।''
मंत्री ने कहा, ''अभी भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में लगभग 25 लाख लोगों को रोजगार (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से) मिला हुआ है, जो औद्योगिक रोजगार के अवसर पैदा करने में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दिखाता है। अकेले मोबाइल विनिर्माण के क्षेत्र में लगभग 12 लाख लोग (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से) काम कर रहे हैं।''
भाषा सुभाष अविनाश
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