पंजाब : भूमि पूलिंग नीति, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ टोल प्लाजा पर किसानों का प्रदर्शन
अमित
- 14 Jul 2026, 05:23 PM
- Updated: 05:23 PM
चंडीगढ़, 14 जुलाई (भाषा) संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने पंजाब सरकार की भूमि पूलिंग नीति और भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के खिलाफ मंगलवार को राज्य के कई टोल प्लाजा पर प्रदर्शन किया और वाहनों को बिना टोल दिए वहां से गुजरने दिया।
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के राष्ट्रीय संयोजक और भारतीय किसान यूनियन (एकता सिद्धूपुर) के अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल के आह्वान पर बड़ी संख्या में किसान टोल प्लाजा पर जुटे और केंद्र एवं पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
विरोध-प्रदर्शन पूर्वाह्न 11 बजे शुरू हुआ और शाम चार बजे तक जारी रहा। इस दौरान प्रदर्शनकारी किसानों ने टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों को बिना किसी शुल्क के भुगतान के वहां से आने-जाने दिया।
किसानों ने बताया कि कलाझाड़, लाडोवाल, चहर, कुराली और डप्पर समेत राज्य के 40 से अधिक टोल प्लाजा पर विरोध-प्रदर्शन किया गया।
मोहाली के डप्पर टोल प्लाजा पर किसान नेता जसविंदर सिंह ने कहा कि वे भूमि पूलिंग नीति, प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते और भूमि बंधक बैंक में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।
सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार हाल में संशोधित भूमि पूलिंग नीति के जरिये किसानों की जमीन "लूटना" चाहती है। उन्होंने आशंका जताई कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते से भारतीय किसानों के हितों पर बुरा असर पड़ेगा।
खरड़ टोल प्लाजा पर एक अन्य किसान नेता ने कहा कि भूमि पूलिंग नीति और भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के विरोध में उन्हें पंजाब सरकार और केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
प्रदर्शनकारी किसानों ने आरोप लगाया कि भूमि पूलिंग नीति के तहत राज्य सरकार उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण करके उसे कॉरपोरेट घरानों को सौंपना चाहती है। उन्होंने इस नीति को वापस लेने की मांग की।
भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते का विरोध करते हुए किसानों ने मांग की कि कृषि, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह समझौता भारतीय किसानों के हितों पर प्रतिकूल असर डालेगा, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए।
किसानों ने केंद्र और पंजाब सरकार से उनकी मांगों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने मांगें नहीं माने जाने पर अपना आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी।
भाषा पारुल अमित
अमित
1407 1723 चंडीगढ़