वायनाड भूस्खलन के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जाएगी: मुख्यमंत्री सतीशन
नरेश
- 08 Jul 2026, 02:18 PM
- Updated: 02:18 PM
(फोटो के साथ)
तिरुवनंतपुरम, आठ जुलाई (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने बुधवार को कहा कि वायनाड में सुरंग परियोजना में हुई दुर्घटना की दो अलग-अलग जांच की जाएगी। इस बात की भी जांच की जाएगी कि क्या परियोजना में शामिल कंपनी ने केंद्र सरकार से मिली पर्यावरण मंजूरी की शर्तों का पालन किया था या नहीं।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सतीशन ने कहा कि सरकार ने हादसे से जुड़ी रिपोर्ट की जांच करने और घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जरूरी सभी तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाएं शुरू करने का फैसला किया है। इस बैठक में भूस्खलन के मामले की समीक्षा की गई, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी और पांच लोग लापता हो गए थे।
सतीशन ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''हमने आपदा से जुड़ी रिपोर्ट का मूल्यांकन करने और उन हालातों की जांच के लिए तकनीकी एवं कानूनी कदम उठाने का फैसला किया है जिसके कारण यह दुर्घटना हुई।''
सतीशन ने कहा कि वायनाड को कोझिकोड से जोड़ने वाली सुरंग का निर्माण कार्य इन दोनों जांचों के पूरा होने के बाद ही फिर से शुरू होगा।
उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें थीं कि भूस्खलन निर्माण स्थल के ऊपर हुआ था। उन्होंने कहा, ''हम इसकी भी जांच करेंगे।''
उन्होंने कहा कि सरकार भूस्खलन में मारे गए लोगों के परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता के तौर पर पांच-पांच लाख रुपये देगी और उनके शवों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने के लिए कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा सरकार इस घटना में घायल हुए लोगों के इलाज का खर्च भी वहन करेगी।
इस हादसे में जिन तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, वे सभी प्रवासी मजदूर थे। इनमें मध्य प्रदेश से ऑपरेटर चंद्रभान, बिहार से सिविल फोरमैन विकास कुमार और झारखंड से श्रमिक अनमोल शामिल हैं।
मंगलवार रात तक हादसे में घायल हुए सात लोगों का मेप्पाडी स्थित वायनाड आयुर्विज्ञान संस्थान (डब्ल्यूआईएमएस) अस्पताल में इलाज किया जा रहा था।
अपने संवाददाता सम्मेलन के दौरान सतीशन ने यह भी कहा कि जब वह विपक्ष के नेता थे तब उन्होंने परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले एक गंभीर पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन की मांग की थी क्योंकि यह क्षेत्र पश्चिमी घाट में आता है जो पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील इलाका है, लेकिन उस वक्त उनका मजाक उड़ाया गया था।
उन्होंने दावा किया, ''मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मुझे विकास विरोधी कहा था।''
उन्होंने तर्क दिया कि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा कराए गए एक अध्ययन में यह निष्कर्ष निकला था कि परियोजना को लागू नहीं किया जाना चाहिए। इसके बावजूद, राज्य सरकार ने इस पर कई कड़ी शर्तें लगाकर परियोजना को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ''इसीलिए मैंने कहा, आइए जांच करें कि आखिर हुआ क्या है।''
राज्य सरकार ने एक दिन पहले दावा किया था कि यह ''मानव निर्मित आपदा'' है क्योंकि जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के मंत्री पी.के. बशीर के निर्देशों के बावजूद निर्माण स्थल पर जमा मलबा नहीं हटाया गया था।
निर्माण कंपनी के महाप्रबंधक (जीएम) ने इस बात का खंडन किया और दावा किया कि भूस्खलन निर्माण स्थल से काफी ऊपर हुआ था।
भाषा सुरभि नरेश
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