केरल मत्रिमंडल ने विड़िण्गम बंदरगाह में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी सौंपने का प्रस्ताव समिति को भेजा
प्रशांत
- 08 Jul 2026, 03:14 PM
- Updated: 03:14 PM
तिरुवनंतपुरम, आठ जुलाई (भाषा) केरल सरकार ने विड़िण्गम बंदरगाह परियोजना में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी 'मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी' (एमएससी) को सौंपने संबंधी एक प्रस्ताव को विस्तृत समीक्षा के लिए बुधवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एक अधिकार प्राप्त समिति के पास भेज दिया है।
यह निर्णय अदाणी बंदरगाह द्वारा विड़िण्गम बंदरगाह की रियायत प्राप्त कंपनी में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी एमएससी की टर्मिनल शाखा को बेचने के लिए 1.4 अरब डॉलर के सौदे की घोषणा करने के एक सप्ताह बाद लिया गया है।
विपक्ष ने पिछले सप्ताह विधानसभा में अदाणी विड़िण्गम बंदरगाह प्राइवेट लिमिटेड (एवीपीपीएल) पर सवाल उठाए थे और उस समय मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने बताया था कि राज्य सरकार को इस संबंध में सूचित नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी कहा था कि रियायत समझौते के तहत रियायत पाने वाली कंपनी की हिस्सेदारी में किसी भी बदलाव के लिए सरकार की स्वीकृति आवश्यक है।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सतीशन ने कहा कि सरकार को इस प्रस्तावित हिस्सेदारी हस्तांतरण के लिए स्वीकृति अनुरोध प्राप्त हुआ है।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ''मंत्रिमंडल ने इस मामले पर चर्चा की और इसे मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली अधिकार प्राप्त समिति के पास भेजने का फैसला किया। यह समिति अपनी सिफारिशें देने से पहले रियायत समझौते, केरल के हितों और कानूनी पहलुओं की समीक्षा करेगी।''
उन्होंने कहा कि कैबिनेट अंतिम फैसला लेने से पहले समिति की सिफारिशों पर विचार करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''राज्य सरकार ऐसा कोई फैसला नहीं लेगी जो केरल के हितों के खिलाफ हो।''
कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक गठबंधन (यूडीएफ) सरकार पर अदाणी बंदरगाह को अपनी हिस्सेदारी एमएससी को हस्तांतरित करने की अनुमति देने के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सतीशन ने किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार किया।
उन्होंने कहा, "एमएससी को हस्सेदारी के प्रस्तावित हस्तांतरण के मामले में इस सरकार ने आखिर क्या गलती की है? मैं मीडिया से यही सवाल पूछ रहा हूं। सरकार ने वास्तव में क्या गलत किया है? जैसा कि मैंने उस दिन विधानसभा में कहा था, उस समय सरकार को इस मामले की जानकारी नहीं थी।''
पूछे गए एक सवाल के जवाब में सतीशन ने मीडिया से इस मुद्दे पर खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, ''जब भी कोई मुद्दा सामने आता है, तो सरकार और मीडिया, दोनों की जिम्मेदारी होती है कि उस पर टिप्पणी करने से पहले तथ्यों को सावधानीपूर्वक जांचें। ज्यादातर खबरों में दावा किया गया कि हस्सेदारी का हस्तांतरण हो चुका है, जबकि ऐसा नहीं हुआ है। अब तक किसी भी शेयर का हस्तांतरण नहीं हुआ है।''
सतीशन ने कहा कि रियायत समझौते में हस्सेदारी के किसी भी हस्तांतरण की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से निर्धारित है।
उन्होंने कहा, ''बंदरगाह की मालिक राज्य सरकार है, जबकि कंपनी को रियायत समझौते के तहत केवल इसके विकास और संचालन का अधिकार मिला है। समझौते की धारा 5.3 के अनुसार, राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना कंपनी के 25 प्रतिशत से अधिक शेयरों का हस्तांतरण नहीं किया जा सकता।''
सतीशन ने कहा कि विधानसभा में उनका बयान इस तथ्य पर आधारित था कि उस समय सरकार को इस संबंध में कोई औपचारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ था।
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