बिहार के मंत्री ने भोजपुर मुठभेड़ में मारे गए व्यक्ति के परिजनों को न्याय का भरोसा दिलाया
नरेश
- 05 Jul 2026, 10:11 PM
- Updated: 10:11 PM
आरा, पांच जुलाई (भाषा) बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने भोजपुर जिले में पिछले महीने पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी के परिजनों से रविवार को मुलाकात की तथा मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय का भरोसा दिलाया।
राज्य सरकार ने 17 जून को हुई मुठभेड़ की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।
मंत्री ने पीड़ित परिवार से उनके पैतृक गांव बिलौटी में मुलाकात करने के बाद कहा कि उन्हें इस मामले के बारे में कई ऐसी बातें पता चली हैं जिनके बारे में उन्हें पहले जानकारी नहीं थी और वह घटनाक्रम के बारे में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को अवगत कराएंगे।
उन्होंने कहा, ''मैं भरत तिवारी के परिवार से मिला और उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें न्याय मिलेगा। इस मामले के कई पहलू ऐसे थे जिनके बारे में मुझे पहले जानकारी नहीं थी, लेकिन अब मुझे उनके बारे में बता दिया गया है। मैं इन सभी मुद्दों पर मुख्यमंत्री को जानकारी दूंगा और उन्हें मौजूदा हालात से अवगत कराऊंगा।''
मंत्री ने कहा कि जांच के दौरान दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घटना में शामिल पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) को पदोन्नति देकर पुरस्कृत किए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए चौधरी ने कहा कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी का तबादला किया गया है।
उन्होंने कहा, ''यह गलत प्रचार किया जा रहा है कि डीएसपी को पदोन्नत किया गया है। उन्हें कोई पदोन्नति नहीं दी गयी है। उनका सिर्फ तबादला किया गया है ताकि जांच पर कोई असर न पड़े।''
मंत्री ने कहा कि सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि अधिकारी के कामकाज को लेकर जनता में असंतोष था, जिसके कारण उनका तबादला किया गया।
उन्होंने कहा कि स्थानीय अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
चौधरी ने कहा, ''जब मुठभेड़ हुई, तो उस इलाके के एसडीएम मौके पर क्या कर रहे थे? इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।''
उन्होंने यह भी कहा कि वह न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष से बात करेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार का न्यायिक जांच का आदेश देना ही निष्पक्ष जांच के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मंत्री ने कहा, ''अगर न्याय सुनिश्चित करने का इरादा नहीं होता, तो न्यायिक जांच की कोई जरूरत नहीं होती। सरकार किसी (पुलिस) महानिरीक्षक (आईजी) स्तर के अधिकारी से जांच करने के लिए कह सकती थी। यह कोई राजशाही नहीं है, और न ही यह ईरान जैसा है जहां सजा मनमानी होती है। हमारे यहां एक न्यायिक व्यवस्था है। इसमें कुछ समय लग सकता है, लेकिन न्याय ज़रूर मिलेगा।"
इस बीच, तिवारी के परिवार ने मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की अपनी मांग दोहराई और चेतावनी दी कि अगर कोई गिरफ्तारी नहीं हुई, तो उनकी मां आशा देवी बृहस्पतिवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगी।
अपने घर पर पत्रकारों से बात करते हुए, तिवारी की बहन रूबी देवी ने कहा कि परिवार की मुख्य मांग मुठभेड़ मामले में आरोपी अधिकारियों की गिरफ्तारी है।
परिवार ने सुरक्षा की भी मांग की, क्योंकि उन्हें मौजूदा हालात में असुरक्षा महसूस हो रही है। रूबी देवी ने अनुरोध किया कि जांच के सिलसिले में उनके घर आने वाले अधिकारी परिवार को पहले से सूचित करें ताकि वे पूरा सहयोग कर सकें।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने 14 "बेगुनाह" ग्रामीणों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की; उन्होंने इन मामलों की समीक्षा करने और बेगुनाह लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की।
परिवार ने यह भी दावा किया कि बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों से देर रात उनके घर के आस-पास नजर रखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि वे तब तक अपना विरोध जारी रखेंगे जब तक निष्पक्ष जांच के ज़रिए उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।
पुलिस के अनुसार, 17 जून को जब अधिकारियों ने तिवारी को गिरफ़्तार करने की कोशिश की, तो उसने अवैध हथियार से उन पर गोली चला दी। पुलिस ने बताया कि उन्होंने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की और बाद में इलाज के दौरान तिवारी की मौत हो गई।
हालांकि, तिवारी के परिवार का आरोप है कि गोलीबारी से पहले ही उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था। उनका दावा है कि उन्होंने अपना हथियार फेंक दिया था और जब पुलिस ने गोली चलाई, तब वह निहत्थे थे। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो का भी ज़िक्र किया है, हालांकि 'पीटीआई-भाषा' स्वतंत्र रूप से इसकी प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं कर सकी है।
भाषा प्रशांत नरेश
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