ओडिशा में सरकारी चिकित्सकों ने हड़ताल स्थगित की, सरकार ने समिति गठित करने का आश्वासन दिया
सुभाष
- 04 Jul 2026, 07:32 PM
- Updated: 07:32 PM
भुवनेश्वर, चार जुलाई (भाषा) ओडिशा के सरकारी चिकित्सकों ने शनिवार को अपनी हड़ताल स्थगित कर दी। यह फैसला स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग के साथ हुई लंबी बैठक के बाद लिया गया, जिसमें उन्होंने चिकित्सकों की मांगों पर विचार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आश्वासन दिया है।
ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (ओएमएसए) के अध्यक्ष किशोर चंद्र मिश्रा ने लोक सेवा भवन में स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ करीब चार घंटे तक चली बैठक के बाद हड़ताल स्थगित किये जाने की घोषणा की।
मिश्रा ने संवाददाताओं से कहा, ''सरकार के साथ हमारी बातचीत बेहद सकारात्मक और सार्थक रही। हमने फिलहाल अपना आंदोलन स्थगित करने का फैसला किया है। सरकार चिकित्सकों की वास्तविक मांगों पर विचार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने पर सहमत हो गई है।''
उन्होंने कहा कि राज्यभर के सरकारी चिकित्सक तत्काल प्रभाव से काम पर लौटेंगे और पहले की तरह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएंगे।
मिश्रा ने कहा, ''हमें उम्मीद है कि अगले दो महीने के भीतर चिकित्सकों की सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा।''
स्वास्थ्य मंत्री महालिंग ने कहा कि ओएमएसए के साथ हुई बातचीत सफल रही और संगठन चार दिन से जारी अपनी हड़ताल को स्थगित करने के लिए सहमत हो गया।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य, सामान्य प्रशासन, विधि और वित्त विभागों के सचिवों की एक उच्चस्तरीय समिति ओएमएसए की 10 सूत्री मांगों पर विचार करेगी।
मंत्री ने कहा, ''ओएमएसए 22 जुलाई को समिति के समक्ष अपनी मांगों का प्रस्तुतीकरण करेगा।''
ओएमएसए के बैनर तले लगभग 8,000 सरकारी चिकित्सकों ने एक जुलाई से कामबंद हड़ताल शुरू की थी। उनकी प्रमुख मांगों में कैडर पुनर्गठन, तबादलों में पारदर्शिता, स्वास्थ्य बीमा, विशेष प्रोत्साहन तथा केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) की तर्ज पर 'डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन' (डीएसीपी) का लाभ शामिल है।
चिकित्सकों की इस हड़ताल से राज्यभर में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। इसके कारण बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी), आपातकालीन सेवाओं तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला मुख्यालय अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित चिकित्सा सेवाओं पर असर पड़ा।
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0407 1932 भुवनेश्वर