संसदीय समिति ने मनरेगा में कम मजदूरी दर पर जतायी चिंता
माधव मनीषा
- 13 Dec 2024, 03:22 PM
- Updated: 03:22 PM
नयी दिल्ली, 13 दिसंबर (भाषा) संसद की एक समिति ने मनरेगा के तहत दी जाने वाली कम मजदूरी पर चिंता जताते हुए प्रश्न उठाया है कि इस महत्वपूर्ण योजना के तहत पारिश्रमिक दरों को मुद्रास्फीति सूचकांक से क्यों नहीं जोड़ा गया।
समिति ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री को सुझाव दिया है कि वह इस योजना के तहत मजदूरी दर बढ़ाने के बारे में एक तंत्र विकसित करे।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज के बारे में कांग्रेस सांसद सप्तगिरि शंकर उल्का के नेतृत्व वाली संसद की स्थायी समिति की बृहस्पतिवार को लोकसभा में सदन के पटल पर रखी गयी रिपोर्ट में यह बात कही गयी है। समिति ने मंत्रालय को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि उसके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।
रिपोर्ट में कहा गया कि मंत्रालय मजदूरी दरों की समीक्षा के बारे में ‘घिसे-पिटे जवाब’ भेज रहा है।
इसमें समिति ने कहा, ‘‘भले ही शहरी हो या ग्रामीण क्षेत्र, मुद्रास्फीति एवं जीवन यापन का खर्च कई गुना बढ़ गया है जो सभी को मालूम है। इस समय भी यदि मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) की अधिसूचित मजदूरी दर को देखा जाए तो कई राज्यों में प्रति दिन पारिश्रमिक दर करीब 200 रूपये हैं जो किसी भी तर्क से परे हैं क्योंकि उसी राज्य में मजदूरी की दर काफी अधिक है। ’’
समिति ने कहा, ‘‘यह बात दुरूह हो जाती है कि मनरेगा को अभी तक ऐसे किसी समुचित सूचकांक से क्यों नहीं जोड़ा जा सका है जो वर्तमान मुद्रास्फीति पर आधारित हो। विभिन्न क्षेत्रों से मनरेगा के तहत मिलने वाली मजदूरी दर को बढ़ाने की मांग से अवगत समिति डीओआरडी (ग्रामीण विकास विभाग) से स्पष्ट शब्दों में अनुरोध करती है कि वह अपने रुख पर पुनर्विचार करे और मनरेगा के तहत पारिश्रमिक दरों को बढ़ाने के लिए एक तंत्र विकसित करे।’’
इसने कहा कि विभिन्न राज्यों में मजदूरी दरों में असमानता भी चिंता का एक अन्य कारण है।
समिति ने संविधान के अनुच्छेद 39 के उपबंध (डी) की ओर ध्यान दिलाते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा कि इसके तहत समान काम के लिए पुरुष एवं महिला को समान दर से मजदूरी दी जानी चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया कि संविधान के प्रावधान के अनुसार मनरेगा के तहत विभिन्न राज्यों में मजदूरी की अलग अलग दर नहीं हो सकती। इसने कहा कि संविधान के तहत मजदूरी की दरों में समानता होनी चाहिए।
इसमें कहा गया, ‘‘समिति दृढ़ता से सिफारिश करती है कि मनरेगा लाभार्थियों को बिना किसी भेदभाव के मजदूरी मिलनी चाहिए तथा सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में मनरेगा के तहत दिए जाने वाले पारिश्रमिक में शीघ्रता के साथ समानता कायम की जानी चाहिए।’’
भाषा माधव