महाराष्ट्र विधान परिषद के चुनाव में 99.02 प्रतिशत मतदान हुआ
माधव
- 18 Jun 2026, 10:19 PM
- Updated: 10:19 PM
मुंबई, 18 जून (भाषा) महाराष्ट्र विधान परिषद की 11 सीट पर चुनाव के लिए मतदान बृहस्पतिवार शाम को समाप्त हो गया। अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान 99.02 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया और वोटों की गिनती 22 जून को होगी।
इन चुनावों में सत्ताधारी महायुति के छह उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जबकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि उनके उम्मीदवारों पर चुनाव से हटने के लिए दबाव डाला गया था।
भाजपा नीत सत्ताधारी गठबंधन ने इस आरोप से इनकार किया है।
माना जा रहा है कि महायुति को इस मुकाबले में बढ़त हासिल है क्योंकि उसने हाल ही में स्थानीय निकायों के चुनावों में बहुमत हासिल किया है। स्थानीय निकाय के सदस्य विधान परिषद चुनाव में मतदाता थे।
अधिकारियों के अनुसार, कुल 7,047 पात्र मतदाताओं में से 6,978 ने (जिनमें नगर निगमों, नगर परिषदों और जिला परिषदों के सदस्य शामिल है) बृहस्पतिवार को अपने वोट का इस्तेमाल किया।
ये द्विवार्षिक चुनाव मूल रूप से 17 सीट (जिसमें एक उपचुनाव भी शामिल था) के लिए घोषित किए गए थे, लेकिन केवल 11 निर्वाचन क्षेत्रों में ही मतदान की जरूरत पड़ी क्योंकि महायुति गठबंधन के घटक दलों भाजपा, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों ने छह सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल की।
भाजपा के उम्मीदवारों में वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली से अरुण लखानी और अहिल्यानगर से प्राजक्त तनपुरे, राकांपा उम्मीदवारों में पुणे से विक्रम काकड़े और रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग से अनिकेत तटकरे और शिवसेना के उम्मीदवारों में ठाणे से रवींद्र फाटक और यवतमाल से दुष्यंत चतुर्वेदी ने निर्विरोध जीत दर्ज की।
तनपुरे नामांकन दाखिल करने से कुछ देर पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे। तनपुरे राकांपा (शरदचंद्र पवार) नेता जयंत पाटिल के भांजे हैं और इससे पहले महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार में मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं।
एमवीए ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी गठबंधन ने पैसे और बाहुबल का इस्तेमाल करके विरोधी उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए मजबूर किया।
शिवसेना (उबाठा) उम्मीदवार बाल माने ने भाजपा के मंत्री नितेश राणे से मुलाकात के बाद कोंकण सीट से अपना नाम वापस ले लिया और इसके बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। पुणे में कांग्रेस के उम्मीदवार शैलेश अग्रवाल और साहेबराव कांबले, और राकांपा (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार श्रीकांत पाटिल भी मुकाबले से हट गए, जिससे महायुति के उम्मीदवारों की जीत का रास्ता साफ हो गया।
औरंगाबाद-जालना में शिवसेना (उबाठा) की उम्मीदवार देवयानी पाटिल डोंगांवकर ने भी चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया।
सतारा-सांगली सीट पर भाजपा के धैर्यशील कदम और राकांपा (शरदचंद्र पवार) के अभयसिंह जगताप के बीच मुकाबले पर सबकी नजरें टिकी थीं। स्थानीय शिवसेना नेताओं में यह सीट सहयोगी भाजपा को दिए जाने पर नाराजगी थी। शिवसेना के मंत्री शंभूराज देसाई ने भाजपा उम्मीदवार को समर्थन देने का भरोसा देने से पहले एक समन्वय बैठक में हिस्सा नहीं लिया था।
लेकिन आखिरकार शिवसेना के बागी नेता तानाजीराव पाटिल ने भी चुनावी दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया।
अमरावती में कांग्रेस उम्मीदवार हर्षजीत देशमुख ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपना नाम वापस ले लिया। पार्टी की वरिष्ठ नेता यशोमति ठाकुर ने आरोप लगाया कि विरोधी पार्टियों ने उन्हें 'अपने पक्ष में कर लिया' था। वीबीए उम्मीदवार नीलेश विश्वकर्मा को समर्थन देने के मामले में भी कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाडी(वीबीए) के बीच मतभेद दिखे।
नासिक में भाजपा नेता गोकुल गीते ने सत्ताधारी गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवार, शिवसेना के नरेंद्र दरादे के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में कदम रखा। इस मामले को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, भाजपा के मंत्री गिरीश महाजन और शिवसेना के मंत्री उदय सामंत समेत महायुति के वरिष्ठ नेताओं ने दखल दिया।
काफी बातचीत के बाद गीते ने अपना चुनाव प्रचार रोक दिया, लेकिन उनका नाम मत पत्र पर बना रहा क्योंकि नाम वापस लेने की समय-सीमा खत्म हो चुकी थी।
भाषा संतोष माधव
माधव
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