उप्र: कैदियों ने बनाए डिजाइनर दीये, मोमबत्तियां और पारंपरिक उत्पाद
आनन्द सिम्मी
- 29 Oct 2024, 05:00 PM
- Updated: 05:00 PM
लखनऊ, 29 अक्टूबर (भाषा) उत्तर प्रदेश की विभिन्न जेलों में इस वर्ष दिवाली का उत्सव खास रहेगा जहां कैदियों द्वारा निर्मित पारंपरिक एवं हस्तशिल्प वस्तुओं का उपयोग कर दीपोत्सव मनाया जाएगा। एक जेल अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि फर्रुखाबाद जिले की फतेहगढ़ जिला जेल की महिला कैदियों द्वारा निर्मित मिट्टी के डिजाइनर दीयों से इस बार जेल के अलावा आम लोगों के घर भी रोशन होंगे।
फतेहगढ़ जिला जेल के अधीक्षक भीमसेन मुकुंद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘महिला कैदियों द्वारा दीपावली के लिए पूर्व की भांति इस वर्ष भी महिला बैरक में मिट्टी के डिजाइनर दीए और डिजाइनर मोमबत्तियां तैयार की गई हैं।''
मुकुंद ने बताया कि ‘जेल बंदी उत्पादन केंद्र’ के माध्यम से आम जनता के बीच इन दीयों की बिक्री की जा रही है जो लोगों को काफी पंसद आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष कारागार के बेकरी प्रशिक्षण केंद्र में निर्मित बिस्कुट और नानखटाई की भी बिक्री खूब हो रही है।
मुकुंद ने बताया कि इस बार एक प्रयोग के तौर पर जेल में निर्मित दीयों, मोमबत्तियों और मिठाइयों का दिवाली ‘हैंपर’ भी बनाया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसकी कीमत बाजार में उपलब्ध हैंपर से काफी कम है। इसकी खासियत यह है कि जेल में बनी नान खटाई शुद्ध देसी घी से बनी है।’’
इस बीच, कारागार प्रशासन ने एक बयान जारी कर बताया कि उन्नाव, आगरा, मथुरा और बाराबंकी की जिला जेल में कैदियों ने गाय के गोबर के दीये बनाए हैं, जिससे इनका पर्यावरण अनुकूल उपयोग सुनिश्चित होगा।
बयान के अनुसार, गाजियाबाद की जेल में मिट्टी के दीये, मोमबत्तियां और झालरें बनाई गई हैं और अलीगढ़ जेल में महिला कैदियों ने मिट्टी के दीयों पर नक्काशी की है।
इसमें बताया गया कि गोरखपुर में टेराकोटा के दीये बनाए जा रहे हैं और अयोध्या की जिला जेल में कैदियों द्वारा बनाए गए करीब 10 हजार दीये आसपास के मंदिरों में दान किए जाएंगे।
बयान में बताया गया है कि हरदोई की जिला जेल में कैदियों ने करीब 11 हजार कुल्हड़ और गुल्लक बनाई हैं और इसी तरह रायबरेली की जिला जेल में मिट्टी के दीये, गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां और गमले जैसे मिट्टी के कलात्मक उत्पाद तैयार किए गए हैं।
इसमें कहा गया कि ये उत्पाद ‘एक जेल, एक उत्पाद’ योजना के तहत बनाए जा रहे हैं, जिन्हें जेल के बिक्री केंद्र पर प्रदर्शनी के माध्यम से बेचा जाएगा।
कानपुर नगर की जिला जेल में दिवाली पूजा के लिए विशेष रूप से देवी-देवताओं के आसन और पूजा की चुनरी बनाई जा रही हैं।
बयान के अनुसार, देवरिया जिला जेल में कौशल विकास मिशन के तहत इलेक्ट्रॉनिकी का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कैदियों ने बिजली की लाइट बनाई हैं जो जेल परिसर की शोभा बढ़ाएंगी।
कन्नौज में अब तक 960 इलेक्ट्रिक झालरें बनाई जा चुकी हैं, जिन्हें स्थानीय बाजार में बेचा जा रहा है।
बयान में कहा गया है कि इस पहल का उद्देश्य न केवल कैदियों की रचनात्मकता को बढ़ावा देना है, बल्कि उनके पुनर्वास और समाज से उनके जुड़ाव के लिए उन्हें सकारात्मक दिशा में प्रेरित करना भी है।
भाषा आनन्द