मनरेगा मांग आधारित योजना, पंजीकरण लक्ष्य तय करना संभव नहीं : सरकार
शफीक पारुल
- 27 Oct 2024, 08:18 PM
- Updated: 08:18 PM
नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर (भाषा) ग्रामीण विकास मंत्रालय ने रविवार को उन रिपोर्ट को खारिज कर दिया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत पंजीकरण घट रहा है।
मंत्रालय ने कहा कि मांग आधारित इस योजना में कुल पंजीकरण के लिए लक्ष्य तय करना संभव नहीं है, क्योंकि वित्तीय वर्ष अभी जारी है।
मनरेगा के कार्यान्वयन पर ‘लिबटेक इंडिया’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस योजना के तहत सक्रिय श्रमिकों की संख्या में आठ प्रतिशत की गिरावट आई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुल 39 लाख श्रमिकों को हटाया गया है, जिससे गलत तरीके से हटाए जाने के संबंध में चिंता बढ़ गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना के तहत 84.8 लाख श्रमिकों के नाम हटा दिए गए, जबकि केवल 45.4 लाख श्रमिकों के नाम जोड़े गए।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘चूंकि, मनरेगा एक मांग आधारित योजना है और वर्तमान वित्तीय वर्ष अभी चल रहा है, इसलिए मानव दिवस सृजन का सटीक लक्ष्य तय करना संभव नहीं है। हालांकि, राज्य/केंद्र-शासित प्रदेश स्थानीय जरूरतों के अनुसार श्रम बजट संशोधन के लिए प्रस्ताव भेज सकते हैं।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘यह ध्यान देने योग्य है कि वित्तीय वर्ष 2006-07 से लेकर वित्तीय वर्ष 2013-14 तक कुल 1660 करोड़ मानव दिवस सृजित (कार्यक्रम के तहत पंजीकृत व्यक्ति द्वारा एक वित्तीय वर्ष में पूरे किए गए कार्य दिवसों की कुल संख्या) किए गए थे, जबकि वित्तीय वर्ष 2014-15 से लेकर मौजूदा वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान कुल 2923 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए हैं।’’
लिबटेक की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस योजना के तहत रोजगार के अवसरों में पिछले वर्ष की तुलना में काफी गिरावट आई है, जो 184 करोड़ से घटकर 154 करोड़ मानव दिवस रह गए हैं।
इसमें यह भी कहा गया है कि सभी श्रमिकों में से 27.4 प्रतिशत या 6.7 करोड़ लोग आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) के माध्यम से वेतन प्राप्त करने के लिए अपात्र हैं।
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) और आधार से जुड़े बैंक खाते में भुगतान के संबंध में मंत्रालय ने कहा कि एबीपीएस एक प्रमुख सुधार प्रक्रिया है, जिसके तहत मनरेगा के श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान सीधे बैंक खातों में किया जाता है।
भाषा शफीक