राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को चार साल में 47,000 से अधिक शिकायतें मिलीं
गोला सुरेश
- 13 Oct 2024, 12:55 PM
- Updated: 12:55 PM
(उज्मी अतहर)
नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) को पिछले चार साल में मुख्यत: दलितों के खिलाफ अत्याचार और भूमि व सरकारी नौकरियों से जुड़े विवादों से संबंधित 47,000 से अधिक शिकायतें मिली हैं। आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।
‘पीटीआई’ द्वारा सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दायर एक आवेदन पर मिले जवाब में एनसीएससी ने कहा कि 2020-21 में 11,917 शिकायतें, 2021-22 में 13,964 शिकायतें, 2022-23 में 12,402 और 2024 में अभी तक 9,550 शिकायतें मिली हैं।
आंकड़ों के बारे में ‘पीटीआई’ से बातचीत में एनसीएससी अध्यक्ष किशोर मकवाना ने कहा कि आयोग को मिली सबसे ज्यादा शिकायतें अनुसूचित जाति समुदाय के खिलाफ अत्याचारों, भूमि विवाद और सरकारी क्षेत्र में सेवाओं से जुड़े मुद्दों से संबंधित हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘शिकायतों के त्वरित निपटान के लिए अगले महीने से, मैं या आयोग के सदस्य राज्य कार्यालयों का दौरा करेंगे और वहां लोगों के सामने आने वाली समस्याओं पर गौर करेंगे।’’
मकवाना ने बताया कि वह लोगों से मुलाकात करने तथा उनकी शिकायतें सुनने के लिए एक सप्ताह में चार बार सुनवाई कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे कार्यभार संभालने के बाद से मैंने आश्वस्त किया है कि मेरा कार्यालय लोगों से मुलाकात के लिए खुला रहे।’’
एनसीएससी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सबसे ज्यादा शिकायतें उत्तर प्रदेश से मिली हैं। उन्होंने बताया कि आयोग को हर दिन 200-300 शिकायतें मिलती हैं और उनमें से कई का कुछ ही दिनों में निपटारा कर दिया जाता है, इसलिए यह जो आंकड़ा है, उनमें ज्यादातर शिकायतें समाधान की प्रक्रिया में हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी एक भी शिकायत नहीं है जिस पर ध्यान न दिया गया हो। वे सभी विचाराधीन हैं।’’
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत नवीनतम सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, अनुसूचित जाति के खिलाफ अधिकांश अत्याचार के मामले 13 राज्यों में केंद्रित थे। वर्ष 2022 के सभी मामलों में से 97.7 प्रतिशत मामले इन्हीं राज्यों में सामने आए।
इस कानून के तहत 2022 में दर्ज किए गए 51,656 मामलों में से, उत्तर प्रदेश में अकेले 12,287 मामले थे। इसके बाद राजस्थान में 8,651 और मध्य प्रदेश में 7,732 मामले थे।
बिहार में 6,799 (13.16 प्रतिशत), ओडिशा में 3,576 (6.93 प्रतिशत) और महाराष्ट्र में 2,706 (5.24 प्रतिशत) मामले दर्ज किए गए। इन छह राज्यों में कुल मामलों के करीब 81 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए।
भाषा गोला