शिक्षण कार्य किये बगैर नहीं रह सकता, अपनी नौकरी वापस चाहता हूं: साईबाबा
देवेंद्र दिलीप
- 08 Mar 2024, 10:48 PM
- Updated: 10:48 PM
नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) माओवादियों से कथित संबंध के मामले में बंबई उच्च न्यायालय द्वारा बरी किये गये दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के पूर्व प्रोफेसर जी. एन. साईबाबा ने शुक्रवार को मांग की कि विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें नौकरी पर बहाल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नौकरी के मामले में उनकी क्षतिपूर्ति भी की जाये।
डॉ जीएन साईबाबा की रिहाई के लिए शिक्षाविदों, वकीलों और वामपंथी राजनीतिज्ञों की समिति ने उनकी बहाली और उन सभी छह लोगों के लिए क्षतिपूर्ति की मांग की, जिन्हें अदालत के फैसले के बाद नागपुर केंद्रीय कारागार से रिहा कर दिया गया था।
यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए 58 वर्षीय साईबाबा ने कहा कि वह शिक्षण कार्य किये बगैर नहीं रह सकते और प्रोफेसर के रूप में अपनी नौकरी फिर से शुरू करना चाहते हैं।
इस मामले में फंसने के बाद साईबाबा को 2021 में डीयू के राम लाल आनंद कॉलेज से नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि सात साल जेल में बिताने के बाद अब उन्हें ऐसा लगता है, जैसे वह जेल की कोठरी में हैं।
अदालत ने साईबाबा को मंगलवार को बरी किया था और दो दिन बाद बृहस्पतिवार को उनकी नागपुर केंद्रीय कारागार से रिहाई हुई।
साईबाबा को कथित माओवादी संबंध मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जेल में बिताये अपने मुश्किल समय को याद किया और पिछले सात वर्षों में उनके परिवार पर क्या गुजरी, इसके बारे में बताते हुए वह भावुक भी हो गए।
साईबाबा ने कहा, ‘‘मैं अभी भी इस बात पर विश्वास नहीं कर पा रहा हूं कि मैं रिहा हो गया हूं। मुझे लगता है कि मैं अभी भी जेल की कोठरी में बंद हूं। यह मेरे लिए एक ‘अग्नि परीक्षा’ जैसा था। मुझे दो बार इस अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ा।’’
मामले में कानूनी लड़ाई के लिए अपने वकीलों को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि उनमें से एक ने बिना किसी फीस के उनका पक्ष रखा।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा समर्थन करने के कारण एक और वकील को जेल हो गई। मुकदमे के दौरान, कुछ पुलिस अधिकारियों ने मेरे वकीलों को धमकी दी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे परिवार को सिर्फ उम्मीद का सहारा था।’’ साईबाबा ने भावुक होते हुए कहा, ‘‘अस्पताल जाने के बजाय, मैंने मीडिया से बात करने का चुनाव किया, क्योंकि आपने मेरा समर्थन किया है। मैंने काफी पीड़ा झेली है, यहां तक कि मुझे एक आतंकवादी भी कहा गया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे ऐसी जेल में कैद किया गया था, जिसकी क्षमता 1,500 कैदियों की है, लेकिन वहां 3,000 कैदियों को रखा गया था। सोने तक की जगह नहीं थी। व्हीलचेयर के बिना मुझे शौचालय जाने, स्नान करने या यहां तक कि अपने लिए पानी लाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था।’’
साईबाबा ने कहा, ‘‘आज मैं आपके सामने जीवित हूं। लेकिन मेरे शरीर का हर अंग काम करना बंद कर रहा है। मुझे जेल में कई चिकित्सा आपात स्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने मुझे केवल दर्द निवारक दवाएं दीं और कुछ जांच की।’’
महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले की एक अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद साईबाबा 2017 से नागपुर की जेल में बंद थे। इससे पहले, वह 2014 से 2016 तक इस जेल में थे और बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।
भाषा
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