शीर्ष अदालत ने सेंथिल बालाजी के मामले की सुनवाई के लिए एक और न्यायाधीश नियुक्त करने को कहा
आशीष माधव
- 30 Sep 2024, 09:46 PM
- Updated: 09:46 PM
नयी दिल्ली, 30 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से तमिलनाडु के मंत्री वी सेंथिल बालाजी से संबंधित मामले की सुनवाई के लिए एक और न्यायाधीश नियुक्त करने को कहा।
शीर्ष अदालत ने बालाजी को कथित नौकरी के बदले नकदी घोटाला से संबंधित धन शोधन के एक मामले में पिछले सप्ताह जमानत दी थी।
बालाजी (48) को रविवार को तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि ने मंत्री पद की शपथ दिलाई। उन्हें बिजली, गैर-पारंपरिक ऊर्जा विकास, आबकारी जैसे प्रमुख विभाग का कार्यभार सौंपा गया है। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में पूर्व में बालाजी के पास इन्हीं विभागों की जिम्मेदारी थी।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने तमिलनाडु के सांसदों और विधायकों से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत के न्यायाधीश की रिपोर्ट पर गौर किया, जिसमें कहा गया कि उनके समक्ष 29 मामले हैं।
पीठ ने कहा कि विशेष न्यायाधीश द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि उनके समक्ष 29 मामले हैं। कई मामलों में सुनवाई शुरू हो चुकी है जबकि कई अन्य में सुनवाई अभी शुरू होनी बाकी है।
पीठ ने कहा, ‘‘इस याचिका का जो विषय है, उसमें 2,000 से अधिक आरोपी और अभियोजन पक्ष के लगभग 600 गवाह हैं। आरोप पत्र में जो आरोप लगाए गए हैं, उन्हें देखते हुए, मामले का तत्काल निपटारा करने की आवश्यकता है।’’
पीठ ने आदेश दिया, ‘‘विशेष न्यायाधीश को सौंपे गए मामलों की संख्या को ध्यान में रखते हुए, यह उचित होगा कि मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश इस मामले के निपटारे के लिए एक सत्र न्यायाधीश नियुक्त करें।’’
पीठ ने रजिस्ट्री को आदेश की प्रति मद्रास उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को भेजने का निर्देश दिया, ताकि आवश्यक कार्रवाई के लिए इसे मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जा सके।
पीठ ने कहा कि मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को मामले को सत्र न्यायाधीश को सौंपना चाहिए, जिन पर अन्य मामलों का बोझ नहीं है और रजिस्ट्रार जनरल को सुनवाई की अगली तारीख पर एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करूर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले बालाजी को पिछले साल 14 जून को नौकरियों के बदले नकदी घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला उस समय का है, जब वह 2011-15 के बीच ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) सरकार के दौरान परिवहन मंत्री थे।
राज्यपाल ने 13 फरवरी को मंत्रिमंडल से बालाजी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। शीर्ष अदालत ने 26 सितंबर को बालाजी को जमानत दे दी।
भाषा आशीष