शिमला में मस्जिद से जुड़े विवाद को लेकर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात: हिमाचल के डीजीपी
सुभाष माधव
- 09 Sep 2024, 10:30 PM
- Updated: 10:30 PM
शिमला, नौ सितंबर (भाषा) हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अतुल वर्मा ने शिमला शहर के संजौली इलाके में एक ‘‘अनधिकृत’’ मस्जिद को लेकर हाल में हुए विवाद का जिक्र करते हुए सोमवार को कहा कि बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किये गए हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
वर्मा ने पत्रकारों से कहा, ‘‘यह एक स्थानीय विवाद है और शिमला जिला प्रशासन, नगर निगम एवं पुलिस अधीक्षक अन्य विभागों की मदद से स्थिति को शांत कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि खुफिया सूचनाएं एकत्र की जा रही हैं, असामाजिक तत्वों पर नजर रखी जा रही है और कानून के उल्लंघन की जांच की जाएगी। उन्होंने यह बात उस सवाल के जवाब में कही, जिसमें पूछा गया था कि कुछ लोग मस्जिद को गिराने के लिए सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डाल रहे हैं।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि कानून अपना काम करेगा और किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
उन्होंने कहा कि बाहरी लोगों का पंजीकरण एक सतत प्रक्रिया है जो जारी है।
हिंदू दक्षिणपंथी संगठनों ने बृहस्पतिवार को यहां चौड़ा मैदान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया था और संजौली क्षेत्र में स्थित ‘‘अवैध’’ मस्जिद को गिराने की मांग की थी।
हिंदू जागरण मंच की हिमाचल इकाई के अध्यक्ष कमल गौतम ने कहा है कि उनकी मांगों में उन ‘‘अवैध ढांचों’’ को ध्वस्त करना शामिल है, जहां राज्य में आने वाले बाहरी लोग शरण लेते हैं। इसके अलावा, वक्फ बोर्ड को खत्म करना और बाहरी लोगों का पंजीकरण करना भी मांगों में शामिल है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा था कि राज्य के सभी निवासियों के समान अधिकार हैं और वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति है, लेकिन किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और शांति सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं।’’
ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और यह मामला पिछले 14 वर्षों से अदालत में विचाराधीन है।
उन्होंने कहा कि यह वैध और अवैध (निर्माण) का मामला है, न कि धर्म का। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि किसी भी अतिक्रमणकारी के खिलाफ कार्रवाई में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
विपक्ष के नेता और भाजपा नेता जयराम ठाकुर का कहना है कि यह धर्म का मामला नहीं है, बल्कि वैधानिकता और अवैधानिकता का मामला है और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
भाषा सुभाष