निर्वाचन आयोग के दौरे से साफ, केंद्र जम्मू-कश्मीर में विस चुनाव कराने को तैयार है: फारूक अब्दुल्ला
नोमान प्रशांत
- 08 Aug 2024, 09:25 PM
- Updated: 09:25 PM
श्रीनगर, आठ अगस्त (भाषा) नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को कहा कि निर्वाचन आयोग की टीम का जम्मू-कश्मीर दौरा केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराने की केंद्र की इच्छा को दर्शाता है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग का तीन सदस्यीय दल विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए आज सुबह यहां पहुंचा।
उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को 30 सितंबर तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। आयोग द्वारा अब तक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा नहीं की गई है।
अब्दुल्ला ने कहा, “अगर वे (विधानसभा चुनावों के लिए) तैयार नहीं होते तो मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) या गृह मंत्री (अमित शाह) और अन्य सभी मंत्री यह घोषणा करते कि चुनाव होंगे।”
विधानसभा चुनाव कराने के लिए केंद्र की तैयारी के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में अब्दुल्ला ने कहा, “अगर वे तैयार नहीं होते तो ऐसा नहीं कहते और इसीलिए निर्वाचन आयोग की टीम आ रही है।”
यह पूछे जाने पर कि क्या चुनावों से जमीनी स्थिति में बदलाव आएगा, क्योंकि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल की शक्तियां बढ़ाई गई हैं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने कहा, “हमें देखना होगा कि स्थिति क्या होती है। यह एक राज्य होगा और इसे एक उपराज्यपाल द्वारा नहीं चलाया जा सकता।”
उन्होंने कहा, “वह (उपराज्यपाल) दिल्ली के वायसराय हैं और वायसराय का पद 1947 में समाप्त हो गया था। यदि वे नए वायसराय बनाना चाहते हैं तो उन्हें शुभकामनाएं।”
अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर देश का शुरुआती बिंदु है और अगर दिल्ली से शासन करने वाले अपनी मौजूदा नीतियों पर चलते रहे तो पूरे भारत में समस्या पैदा हो जाएगी। उन्होंने कहा, “मैं अन्य राज्यों को सावधान रहने की चेतावनी देता हूं। आज हम मुसीबत में हैं, कल आप सब होंगे।”
अपने बेटे उमर अब्दुल्ला के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार शेख अब्दुल रशीद उर्फ इंजीनियर रशीद से हारने पर नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख ने कहा कि आजादी के नारे लगाने वाला व्यक्ति (रशीद) विजयी हुआ है, जो दिल्ली के लिए चेतावनी है।
उन्होंने कहा, “यह दिल्ली के लिए चेतावनी है कि जो व्यक्ति (रशीद) जीता है... उसका नारा क्या था? ‘हम क्या चाहते हैं आजादी’। तो, एक आंदोलन है जो पाकिस्तान या भारत का हिस्सा नहीं बनना चाहता... हमें इसके बारे में ईमानदार होना चाहिए। आप ऐसी चीजों को कितना छिपाएंगे? यह उन्हें तय करना है।”
भाषा नोमान