वायनाड आपदा अवैध मानव बस्तियों के विस्तार, खनन गतिविधियों का परिणाम : भूपेंद्र यादव
सुभाष प्रशांत
- 05 Aug 2024, 04:10 PM
- Updated: 04:10 PM
नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को कहा कि केरल सरकार ने राज्य के पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र में अवैध मानव बस्तियों के विस्तार और खनन गतिविधियों की अनुमति दी, जिसके चलते वायनाड जिले में विनाशकारी भूस्खलन हुए।
मंत्री ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा कि पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र संबंधी अधिसूचना पर राज्यों के साथ परामर्श शीघ्र पूरा किया जाना चाहिए।
पर्यावरण मंत्रालय ने छह राज्यों में फैले 56,800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले पश्चिमी घाट को पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने के लिए 10 मार्च 2014 से छह मसौदा अधिसूचनाएं जारी कीं। इनमें से एक मसौदा अधिसूचना 31 जुलाई को जारी की गई। लेकिन राज्यों की ओर से आपत्तियों के बीच, अंतिम अधिसूचना लंबित है।
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि इसमें सफलता हासिल करने के लिए अप्रैल 2022 में एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई जो ‘‘राज्यों के साथ निरंतर संपर्क में है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि वनों का मालिकाना हक राज्यों के पास है, इसलिए हमने उनसे अपनी आपत्तियां और सुझाव पूर्व वन महानिदेशक की अध्यक्षता वाली समिति को सौंपने को कहा था। स्थानीय हितधारकों के साथ भी परामर्श किया जाना चाहिए। ऐसा करने के बजाय, (केरल में) अवैध मानव बस्तियों के विस्तार और खनन की अनुमति दी गई जिसके परिणामस्वरूप (वायनाड में) यह प्राकृतिक आपदा आई।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिमी घाट हिमालय पर्वतमाला की तरह ही देश में सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्र है। ऐसे क्षेत्रों में आपदाओं की रोकथाम के लिए गंभीर प्रयास किये जाने चाहिए और इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी केरल सरकार की भी है।’’
पिछले सप्ताह, केंद्र ने केरल के भूस्खलन प्रभावित वायनाड के 13 गांवों सहित छह राज्यों में पश्चिमी घाट के 56,800 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) घोषित करने के लिए छठी मसौदा अधिसूचना जारी कर 60 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
अधिसूचना 31 जुलाई को जारी की गई थी, जिसके एक दिन पहले वायनाड में भूस्खलन की घटनाओं में 300 से अधिक लोगों की मौत हुई।
राज्य और अन्य जगहों के वैज्ञानिकों ने इस आपदा के लिए वन क्षेत्र का घटना, पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में खनन और जलवायु परिवर्तन के संयुक्त प्रभावों को जिम्मेदार ठहराया है।
मसौदा अधिसूचना में केरल के 9,993.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील घोषित करने का प्रस्ताव है, जिसमें भूस्खलन प्रभावित जिले के दो तालुका के 13 गांव शामिल हैं।
इन 13 गांवों में मनंथावाडी तालुका में पेरिया, थिरुनेली, थोंडरनाड, त्रिसिलेरी, किदांगनाड और नूलपुझा और विथिरी तालुका में अचूरनम चुंडेल, कोट्टापडी, कुन्नाथिदावका, पोझुथाना, थारियोड और वेल्लारीमाला शामिल हैं।
हालिया भूस्खलन में विथिरी तालुका के मुंडक्कई, चूरलमाला और अट्टामाला गांव प्रभावित हुए, जिन्हें मसौदा अधिसूचनाओं में शामिल नहीं किया गया है।
कुल मिलाकर, अधिसूचना में 56,825.7 वर्ग किमी क्षेत्र को पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील घोषित करने का प्रस्ताव है, जिसमें गुजरात में 449 वर्ग किमी, महाराष्ट्र में 17,340 वर्ग किमी, गोवा में 1,461 वर्ग किमी, कर्नाटक में 20,668 वर्ग किमी, तमिलनाडु में 6,914 वर्ग किमी और केरल में 9,993.7 वर्ग किमी क्षेत्र शामिल है।
भाषा सुभाष