दिल्ली पुलिस ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच का दायरा बढ़ाया
रंजन
- 23 Jul 2026, 11:04 PM
- Updated: 11:04 PM
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) दिल्ली के जंतर मंतर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित हिंसा की जांच का दायरा बढ़ाते हुए सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन वीडियो, मोबाइल फोन रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल सबूतों का विश्लेषण किया जाएगा। दिल्ली पुलिस के एक सूत्र ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने कहा कि इस विश्लेषण के जरिए सुरक्षाकर्मियों पर हमलों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए कई टीमें बनाई गई हैं।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या प्रदर्शन स्थल पर "बाहरी लोग" और "आदतन अपराधी" प्रदर्शनों में घुस आए हैं और "आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा" में शामिल थे।
पुलिस सूत्र के अनुसार, प्रदर्शन से पहले और प्रदर्शन के दौरान मिली खुफिया जानकारी से संकेत मिला था कि "नियमित प्रदर्शनकारी" नहीं होने के बावजूद हजारों लोग प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे, जिससे यह आशंका पैदा हो गई है कि असामाजिक तत्व हिंसा भड़काने के लिए इस धरने का इस्तेमाल कर सकते हैं।
सूत्र ने कहा, "कई टीमें बनाई गई हैं, और टीमें अब इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या ऐसे व्यक्तियों ने पत्थरबाजी, सुरक्षाकर्मियों पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं में कोई भूमिका निभाई।"
उन्होंने कहा, "हिंसक गतिविधियों में सीधे तौर पर शामिल लोगों की पहचान करने के लिए पुलिस की कई टीमें सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन, मोबाइल फोन, मीडिया संगठनों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों द्वारा बनाए गए फुटेज का विश्लेषण कर रही हैं। आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू करने से पहले व्यक्तिगत भूमिका तय करने के लिए डिजिटल फुटेज, कॉल डिटेल विश्लेषण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सहित तकनीकी साक्ष्यों का मिलान खुफिया जानकारी और गवाहों के बयानों से किया जा रहा है।"
अधिकारी ने बताया कि पुलिस, जहां कानूनी रूप से अनुमति है, वहां चेहरे की पहचान मिलान तकनीक (फेशियल कंपैरिजन) का इस्तेमाल करने के साथ-साथ निगरानी कैमरों में दर्ज आवाजाही के पैटर्न और डिजिटल टाइमलाइन के जरिए घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ने में भी जुटी है।
पुलिस ऐसे कई वीडियो पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है जिनमें मास्क पहने या मुंह ढके हुए लोग कथित तौर पर पत्थरबाजी और हिंसक घटनाओं में शामिल दिख रहे हैं।
सूत्र के अनुसार, ऐसे लोगों की पहचान करना जांच की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक बन गया है, और फोरेंसिक तथा तकनीकी टीमें झड़पों से पहले, इनके दौरान और इनके बाद में उनकी पहचान और आवाजाही का पता लगाने के लिए फुटेज की 'फ्रेम-दर-फ्रेम' जांच कर रही हैं।
पुलिस देर शाम और रात के समय पुलिसकर्मियों पर हमलों के कथित पैटर्न की भी साथ-साथ जांच कर रही है।
पुलिस ने कहा कि शुरुआती निष्कर्षों से संकेत मिला है कि कुछ कथित हमले तब हुए जब पुलिस कर्मियों की पाली बदल रही थीं और कर्मी या तो तैनात होने के लिए रिपोर्ट कर रहे थे या अपना काम पूरा करके लौट रहे थे।
अधिकारी अब विभिन्न घटनाओं को आपस में जोड़ रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या कथित हमले समन्वित थे और क्या कई स्थानों पर एक ही समूह या लोग शामिल थे।
पुलिस का कहना है कि जांचकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या कुछ हमलावरों ने बड़ी संख्या में तैनात पुलिस कर्मियों से उलझने के बजाय ड्यूटी शिफ्ट बदलने के दौरान जानबूझकर अपेक्षाकृत अकेले पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया। इस पहलू की जांच घटनाओं के समय, तैनाती के रिकॉर्ड, वायरलेस लॉग और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण के आधार पर की जा रही है।
खुफिया एजेंसी विरोध प्रदर्शन की अवधि के दौरान राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने वाले लोगों की आवाजाही की भी जांच कर रही है।
सूत्र ने बताया कि प्रदर्शन स्थल जाने वाले व्यक्तियों की पहचान करने और यह पता लगाने के लिए कि क्या उनका कोई आपराधिक इतिहास है या कानून-व्यवस्था से जुड़े पिछले मामलों से कोई संबंध है, पुलिस टीमों ने प्रमुख रेलवे स्टेशनों, अंतर-राज्यीय बस टर्मिनलों और अन्य परिवहन केंद्रों पर सत्यापन व जांच अभियान तेज कर दिया है।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जमीनी इकाइयों को सत्यापन कार्य के दौरान खुफिया टीमों और स्थानीय पुलिस थानों के साथ निकट समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
उनके अनुसार, संदिग्ध गतिविधियों, संगठित यात्रा पैटर्न और उन लोगों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जिनकी प्रदर्शन स्थल पर मौजूदगी उनकी यात्रा के घोषित उद्देश्य से मेल नहीं खाती है।
पुलिस ने कहा कि खुफिया जानकारी से संकेत मिला है कि "आपराधिक गतिविधियों के लिए कुख्यात क्षेत्रों" सहित दिल्ली के विभिन्न हिस्सों से कई लोग आंदोलन के दौरान प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे। पुलिस ऐसे लोगों की पृष्ठभूमि की जांच कर रही है और मौजूदा आपराधिक रिकॉर्ड के साथ उनके विवरण की तुलना कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या कोई संगठित समूह किसी भी तरह से इसमें शामिल था।
सूत्र के अनुसार,सुरक्षा स्थिति का आकलन करने और जांच की प्रगति की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारी रोजाना दो बार उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। ये बैठकें कानून-व्यवस्था बनाए रखने, कर्मियों की तैनाती, खुफिया आकलन और दंगे तथा पुलिसकर्मियों पर हमलों में कथित तौर पर शामिल लोगों की पहचान पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के केंद्र बिंदु जंतर-मंतर पर स्थिति फिलहाल शांतिपूर्ण है और पर्याप्त तैनाती के साथ नियंत्रण में है।
पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन और उसके बाद हुई झड़पों में करीब 200 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। घायलों में कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जैसे संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मोनिका भारद्वाज, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त निहारिका भट्ट और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त सृष्टि पांडे।
पुलिस ने कहा कि उसने हिंसा के संबंध में अब तक 12 प्राथमिकी दर्ज की हैं और अधिक साक्ष्यों की जांच तथा अधिक आरोपियों की पहचान होने पर अतिरिक्त मामले दर्ज करने की योजना बना रही है।
भाषा नोमान
नोमान रंजन
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